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समय का महत्व

जीवन में समय की उपयोगिता पर निबंध 

समय एक ऐसी चीज है इसके महत्व को हर कोई जानते हुए भी अनजान बना हुआ है चाहे वह विद्यार्थी जीवन हो या फिर कोई सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति, लेकिन जो इसके महत्व को जानता है वह करोड़ों की भीड़ में कुछ अलग ही लगता है

आज के भागदौड़ वाले जिंदगी में  हमें हर कोई  अत्यंत वयस्थ  दिखाई देते हैं पर क्या वह सच में ही समय के महत्व को जानते हैं इस पर एक गंभीर सवाल है हम अक्सर विद्यार्थियों को देखते हैं कि उन्हें परीक्षा के समय का पता होता है लेकिन फिर भी वह इससे अनजान रहते हैं और अपने समय को सोशल मीडिया और  दोस्तों के साथ मौज मस्ती करने में व्यस्त करते हैं,

काम हमेशा अगर समय पर हो तो सबको अच्छा लगता है उदाहरण के लिए अगर आप रेलवे स्टेशन पर जाए और ट्रेन समय पर आए तो आपको अच्छा लगेगा वहीं अगर कोई सरकार द्वारा चलाई गई योजना समय पर आपके पास पहुंच जाए तो आप अत्यंत प्रसन्न होंगे, लेकिन जब बात आपके अपने समय के पालन करने की आती है तो आप उसे नजरअंदाज कर देते हैं और आगे के लिए टाल देते हैं

अक्सर हमें काफी दिन बाकी है या फिर काफी समय बाकी है कि बात सुनाई देती है लेकिन सच तो यह है. कि बहुमूल्य समय कभी नहीं रुकता और न हे ये ज्यादा मोहद होता, तभी विद्वान व्यक्तियों द्वारा कहा जाता है कि मेरा सारा धन ले लो और मुझे समय दे दो क्योंकि उन्हें भी पता है कि समय सबसे बहुमूल्य चीज है.

अगर कोई व्यक्ति सही समय पर परिश्रम करता है तो उसका संपूर्ण जीवन परिवर्तित हो जाता है इसलिए हमेशा समय के महत्व को समझना चाहिए खासकर विद्यार्थियों को क्योंकि अगर वह अपने समय के मूल्य को समझेंगे तो कभी समय को व्यर्थ  नहीं होने देंगे, और उस खाली समय में कुछ ना कुछ आवश्यक काम जरूर करेंगे जिससे नए केवल उनका विकास होगा इसके अलावा देश का भी विकास होगा क्योंकि किसी भी देश के अर्धव्यवस्था को बदलने में कुछ ही समय की आवश्यकता होती है

Value Of Time Essay In Hindi
Value Of Time Essay In Hindi

जल संरक्षण

जल बचाओ पर निबंध {Essay on Save Water in Hindi}


जल प्रकृति का ऐसा वरदान है जिस पर जीवन का अस्तित्व और हम आज के आधुनिक समय में पहुंच पाए, बिना जल के जीवन के कामना करना ही व्यर्थ है चाहे  हम अपने किसी भी कार्य को पूरा करते हो उसमें जाल प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विद्यमान होता है,

अगर हमारे ग्रह की बात करें तो पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जल विद्यमान है
बाकी बचे हुए ग्रह पर या तो जल मौजूद नहीं है या फिर वह गृह मनुष्य के रहने लायक नहीं है अगर हम अपने ग्रह की बात करें तो यहां धरती के लगभग 70 % हिस्से पर जल विद्वान है, और यह तीन अवस्था में पाया जाता है सॉलिड, लिक्विड, गैस.

 धरती पर मौजूद सभी प्रकार के जीव जंतु कौ जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है जल के बगैर कोई भी व्यक्ति  तीन-चार दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकता।

लेकिन आज के आधुनिक दौर में हम इसके महत्व  को लगातार कम करके आंक रहे हैं खास करके हमारे देश भारत में जहां बहुत अधिक मात्रा में जल होने के कारण हमें इसके महत्व का सही ज्ञान नहीं है जबकि कुछ ऐसे देश भी है  जहां जल की बहुत किल्लत है एव पीने लायक जल्दी उचित मात्रा में नहीं मिलता, इसका कारण इंसान इन गतिविधियों एवं संतुलन के साथ छेड़छाड़ है.

लगातार बढ़ते प्रदूषण और धरती के तापमान से हमारे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं जो  पीने लायक जल के बहुत बड़े स्रोत है इसके अलावा जल का बहुत अधिक मात्रा में प्रदोष व्रत होना, खास करके नदियों में गिरने वाले उद्योग धंधे तथा  कृषि में उपयोग होने वाले रसायन सीधे तौर पर जल को दूषित कर रहे हैं

 इसकी वजह से जल में रहने वाले जीव बहुत तेजी से खत्म हो रहे हैं बहोत अधिक प्रजातियां तो  लगभग लुप्त  तो हो गई है उनमें से अधिकतर हमारे धुरवो में रहने वाले जीव है,

जल के अंधाधुंध इस्तेमाल की वजह आज काफी जगह पर जल स्तर बहुत नीचे चला गया है इसकी वजह से बाकी लोग तो स्थापित हो ही रहे हैं वह भूमि में कृषि योग्य नहीं रही

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हमें जल के महत्व को समझना चाहिए और वर्षा ऋतु जल का संग्रह करना चाहिए

 आज के आधुनिक दौर में जल को फिल्टर करने वाले बहुत से उपकरण  आ चुके हैं सरकार को चाहिए कि उनका सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तथा जल की लगातार बर्बादी से बचा जा सके क्योंकि अगर हम इस समय में जल का संरक्षण नहीं करेंगे तो भविष्य में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ सकता है

इसीलिए अब थोड़ा सा परिश्रम करके आने वाले बड़े खतरे को डालने में हमें अपना योगदान देना चाहिए।

पृथ्वी बचाओ

पृथ्वी बचाओ पर  निबंध {Essay on Save Earth in Hindi}

हमारे सौरमंडल में पृथ्वी ही बस ऐसा ग्रह है जहां पर जीवन पनपने  और इसके लगातार आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद है, हमारा पर्यावरण पूरे सौरमंडल में जीवन के लिए अकेला उपयोगी माहौल देता है, पृथ्वी पर उचित मात्रा में जल मौजूद है जो कि जीवन के लिए एक बहुत जरूरी पदार्थ है, वही यहां पर वायु में मौजूद  ऑक्सीजन भी हमारे सांस लेने के लिए पर्याप्त मात्रा में मौजूद है वही  हमारा वायुमंडल जो कि अंतरिक्ष से आने वाले विभिन्न उल्कापिंड तथा सूर्य के खतरनाक रेडिएशन से हमारी रक्षा करता है.

धरती ही एक ऐसा ग्रह है जहां पर पेड़ पौधे वन्य जीव जंतुओं की इतनी अद्भुत और विचित्र प्रजातियां देखने को मिलती  हैं यह पेड़ पौधे  धरती के संतुलन को बनाए रखने में बहुत बड़ा योगदान देते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से जिस तरीके से हमने धरती पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का आवश्यकता से बहुत अधिक इस्तेमाल किया है उसने इस  सुंदर ग्रह को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाया है.

उद्योग धंधों से निकलने वाला खतरनाक जहरीला धुआँ  और  कचरा सीधे हमारे वायुमंडल तथा नदियों  में प्रवेश कर रहा है, वही पेड़ों की लगातार कटाई से मौसम में विचित्र बदलाव देखने को मिलते हैं आज ग्लोबल वार्मिंग हमारे लिए एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है जिसकी वजह से हमारे उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव में मौजूद बर्फ  बहुत तेजी से पिघल रही है, इसकी वजह से समुंदर का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है वही बिन मौसम बारिश या  बारिश ना होना और बहुत अधिक बाढ़ आना भी पृथ्वी पर आ रहे इन बदलावों को दिखाता है,

आज बहुत सारे अद्भुत वन्यजीव या तो लुप्त हो गए हैं या फिर लुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है और यह हमारे इस ग्रह के आने वाले भविष्य के लिए बहुत अच्छा संकेत नहीं है हमें आज इसके लिए कुछ जरूरी कदम उठाने की जरूरत है तथा कुछ समय इंटरनेट और फेसबुक की दुनिया से निकल कर हमारे इस सुंदर ग्रह के लिए परिश्रम करने का वक्त आ गया है ताकि हमारे आने वाला भविष्य सुरक्षित रहे,  सबसे बड़ा योगदान हम विद्यार्थी दे सकते हैं क्योंकि अगर हम इस विषय को गंभीरता से लेंगे तो हम समाज पर एक गहरा प्रभाव डाल सकते हैं.

पृथ्वी बचाओ पर 10 लाइनें

10 Lines on Save Earth in Hindi

हमारे सोलर सिस्टम में धरती ही एक ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है इसका मुख्य कारण इसपर मौजूद प्रकृति का अद्भुत संतुलन है

बढ़ते वायु प्रदूषण तथा संसाधनों के गैर जिम्मेदार उपयोग की वजह से आज धरती का तापमान बढ़ रहा है इससे हमारे ग्लेशियर पिघल रहे हैं इसके कारण कई देश पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है

पेड़ों की अंधाधुन कटाई की वजह से पशु पक्षियों की प्रजाति लुप्त हो रही है जिससे कि हमारा प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है जोकि जीवन के लगातार विकास के लिए ठीक नहीं है

धरती को बचाने के लिए हमें वाहनों का इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब अत्यंत जरूरी हो क्योंकि वाहनों से निकलने वाले धुएं से वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है

जल के अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से धरती मैं मौजूद जल वास्तव लगातार घटता जा रहा है जिससे  कई इलाकों में पीने लायक पानी भी नहीं बचा इस स्थिति से बचने के लिए हमें जल के महत्व को समझना पड़ेगा

उद्योग धंधे से निकलने वाला खतरनाक कचरा सीधे जल स्रोतों में गिरने से न केवल जल बल्कि उस में रह रहे जीव जंतु भी प्रभावित हो रहे हैं जिससे  कि जलीय जीवो का संतुलन बिगड़ रहा है इसको रोकने के लिए हमें जल उपचार करने की जरूरत है

धरती को बचाने के लिए हमें कृषि में इस्तेमाल हो रहे खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल कम करना पड़ेगा जो भूमि को दूषित कर रहे हैं

धरती का तापमान बढ़ने की मुख्य वजह कार्बन डाइऑक्साइड है इसलिए हमें कोयले का इस्तेमाल बंद करना पड़ेगा जिससे कि हमारी धरती सुरक्षित रहे

हमें रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि यह प्रदूषण से मुक्त होते हैं और असीमित मात्रा में मौजूद है

आज के इस प्रदूषित माहौल में हमें धरती को बचाना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि अगर हमारी धरती सुरक्षित रहेगी तभी हम सुरक्षित रहेंगे और जीवन का विस्तार होता रहेगा नहीं तो इस सुंदर ग्रह पर रहना नामुमकिन हो जाएगा


अनुशासन

अनुशासन पर निबंध तथा जीवन में अनुशासन का महत्व

अनुशासन का अर्थ होता है अपने उपर शासन यानी किसी व्यक्ति का अपने ऊपर कितना नियंत्रण है कोई भी काम करते या किसी से भी बोलते समय  एक अच्छा अनुशासित व्यक्ति केवल अपने अनुशासन के बलबूते समाज में अपनी एक पहचान बनाता है और हर किसी से प्रशंसा एवं सम्मान प्राप्त करता है

एक सुखी और समृद्ध जीवनयापन के लिए किसी भी व्यक्ति का अच्छे तरीके से अनुशासन में होना अति आवश्यक है अगर कोई व्यक्ति अपने कार्य में सही तरीके से अनुशासित नहीं होगा तो वह उस कार्य पर ध्यान लगाकर काम नहीं कर सकता और ना ही वह अपने द्वारा तय किया गया लक्ष्य पा सकता है

हमारे जीवन में अनुशासन के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाल्यकाल से ही अनुशासित रहने की शिक्षा दी जाती है जिसकी शुरुआत हमारे स्कूलों से होती है स्कूल में हर छात्र पूर्ण रूप से अनुशासित होकर समय पर जाता है स्कूल की वर्दी पहनता है जो कि हमें आने वाले समय में समय का पालन और अच्छे रहन-सहन की शिक्षा देता है

परिवार में भी अनुशासित व्यक्ति का हमेशा सम्मान होता है जब भी कोई जरूरी निर्णय परिवार के सदस्य द्वारा लिया जाता है तो हमेशा अनुशासित व्यक्ति से चर्चा कि जाती है चाहे वह उम्र में ही छोटा क्यों ना हो इसके अलावा अनुशासित विद्यार्थी हमेशा अध्यापक का प्रिय रहता है जिससे कि अध्यापक और विद्यार्थी के बीच एक विशेष रिश्ता बन पाता है

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनुशासन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है अनुशासन केवल किसी से अच्छे तरीके से वार्तालाप करना ही नहीं बल्कि अपने दिनचर्या में इसको लाना है चाहे कोई अपने सामने हो या ना हो

आप चाहे किसी भी क्षेत्र में चले जाए चाहे वह खेल का मैदान हो या फिर कोई कंपनी या फिर हमारी सेना हर कोई अनुशासन की वजह से अपनी एक विशेष पहचान बनाता है अगर कोई खिलाड़ी मैदान में अनुशासन से खेलते हैं तो वह हमेशा सम्मान प्राप्त करते हैं चाहे वह विरोधी टीम का ही खिलाड़ी क्यों ना हो वहीं सैनिक अपने अनुशासन की वजह से हर घर में उदाहरण के रूप में प्रशंसा पाते हैं

हम अपने जीवन में अनुशासन को लाने के लिए बहुत सारे तरीके अपना सकते हैं जैसे कि अच्छा पौष्टिक खाना खाना चाहिए एवं समय पर सोना चाहिए क्योंकि अच्छा खाना हमारे मस्तिष्क को अच्छे विचारों से भरता है और सही नींद से हमारे मस्तिष्क को आराम मिलता है और हम अगले दिन अच्छे तरीके से किसी कार्य को कर सकते हैं

अक्सर देखा गया है कि पढ़ाई के समय अनुशासन में रहना काफी कठिन होता है जिसका कारण होता है हम बहुत अधिक विशाल लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं जिससे कि उसको पूर्ण करने में काफी समय लगता है लेकिन हमारा मस्तिष्क काफी समय तक लगातार एक लक्ष्य के पीछे अनुशासित नहीं हो पाता इसके लिए हमें चाहिए की छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करें ताकि जब वह लक्ष्य प्राप्त हो तो हमें आनंद महसूस हो और हमें अगला लक्ष्य पाने के लिए प्रोत्साहन भी मिले इसके साथ ही हम लक्ष्य की प्राप्ति पर खुद को कुछ उपहार भी दे सकते हैं या अपनी प्रशंसा खुद कर सकते हैं इससे की सुखद अनुभव हो एवं हमारे अंदर के अनुशासन में वश्रदी होकर हमारा अपने ऊपर नियंत्रण बड़े

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि अनुशासन न केवल किसी व्यक्ति बल्कि संपूर्ण देश की प्रगति में विशेष प्रभाव डालता है क्योंकि जब उस देश के नागरिक अनुशासित होंगे तो वह अच्छी लगन मेहनत से कार्य करेंगे जिससे कि वह देश संपूर्ण तरक्की करेगा

Discipline essay in hindi
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    खेलो के महत्व

    खेलो के महत्व पर निबंध

    भारत में अगर खेलों की बात करें तो यहां खेल केवल बालयकाल में ही खेला जाते हैं तथा इनकी तरफ कम ही ध्यान दिया जाता है खासकर माता-पिता अपने बच्चों को खेलों में ज्यादा ध्यान न देख कर पढ़ाई की तरफ ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित करते हैं इसकी वजह है भारत में खेलों का स्तर और खेलों के प्रति जागरूकता का ना होना

    आज के आधुनिक दौर तथा हमारे भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने स्वास्थ्य एवं शारीरिक विकास पर ध्यान देना लगभग भूल ही गए हैं जिससे कि हमारा शरीर स्वस्थ एवं मजबूत बना रहे

    वैसे तो शरीर को स्वस्थ एवं संतुलित रखने के लिए योग, जिम तथा प्रातकाल की सैर शामिल है लेकिन इसमें खेलों का महत्व भी कोई कम नहीं है इसलिए आज हमारे लिए जरूरी है कि हम खेलों के महत्व के बारे में जाने और इससे फायदा का लाभ उठाकर एक स्वस्थ समाज बनाएं

    खेल के महत्व

    जब हम कोई खेल खेलते हैं तो हमारा शरीर की मांसपेशियों तथा मस्तिष्क में ऊर्जा का संचार होता है जिससे कि नए केवल खेल खेलते समय आलस खत्म होता है इसके अलावा खेल की समाप्ति के बाद भी हमें बाकी कार्य करने में आलस महसूस नहीं होता

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी तथा आगे निकलने की होड़ की वजह से हमारे उपर काफी दबाव आता है खासकर की मस्तिष्क में सही निर्णय लेने की क्षमता पर भी असर पड़ता है खेल खेलने से हमारे मस्तिष्क पर पढ़ा यह दबाव कम होता है और हम शांति पूर्ण रूप से निर्णय ले सकते हैं

    ज्यादातर खेलों में हम एक टीम की तरह खेलते हैं और जीतते है इससे हमें जीवन में एक साथ मिलकर कार्य करने के शिक्षा मिलती है जो एक मूलभूत शिक्षा है प्रेम पूर्वक जीवन यापन करने की

    इसके अलावा आज खेलों में उच्च स्तर तक पहुंचे हुए खिलाड़ी को समाज में न केवल सम्मान मिलता है बल्कि बहुत अच्छी मात्रा में धनराशि भी मिलती है जिससे कि वह एक बहुत अच्छा जीवन यापन कर सकता है आज सरकार द्वारा खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को विभिन्न तरह की धनराशि तथा उच्च पदों पर नौकरी दी जा रही है जिससे कि कोई भी व्यक्ति खेल खेलते वक्त अपने भविष्य को लेकर थोड़ा सा भी संकोचीत ना हो

    इन सभी योजनाओं का उद्देश्य भारत को खेलों में आगे बढ़ाना है ताकि भारत दुनिया में खेलों के प्रति अपनी पहचान बना सके | वैसे भी आज खेलों में अधिक मेडल जीतने वाले देश को ही शक्तिमान माना जाता है यही कारण है कि अमेरिका और चीन जैसे देश खेलों पर इतना धन खर्च करते हैं

    खेलों के इन महत्व को जानते हुए हम कह सकते हैं कि किसी भी व्यक्ति के जीवन में खेलों का बहुत अधिक महत्व है और अब समय आ गया है कि खेलों को भी गंभीरता से लिया जाए ताकि हमारे साथ साथ देश का नाम भी पूरी दुनिया में रोशन हो

    importance of games in hindi

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    चारमीनार

    चारमीनार पर निबंध 

    चारमीनार भारत के दक्षिण मैं स्थित तेलंगाना राज्य के हैदराबाद शहर में है चारमीनार भारत के इतिहास की एक महत्वपूर्ण धरोहर है जिसका निर्माण 1591 ईस्वी में मुहम्मद कुली कुतुब शाह द्वारा कराया गया था

    चारमीनार की ऊंचाई 160 फीट है चारमीनार का नाम मुख्य रूप से चार और मीनार के शब्दों से मिलकर बना है जिसको हम अंग्रेजी में चार टावर का स्ट्रक्चर भी कह सकते हैं

    charminar
    old pic of  charminar


    चारमीनार का रूप एक वर्क की तरह है और इसके मीनारों की ऊंचाई लगभग एक समान है चारमीनार के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने प्लेग महामारी जो कि चूहों द्वारा होती है से अपने लोगों को बचाने के लिए चारमीनार का निर्माण कराया था ताकि अल्लाह लोगों की रक्षा कर सकें

    चारमीनार भारत के साथ-साथ पूरे विश्व में फेमस है हर साल हजारों पर्यटक चारमीनार को देखने आते हैं जिससे कि स्थानीय लोगों के रोजगार के साथ साथ उनकी आमदनी की होती है

    चारमीनार की सबसे ऊपरी मंजिल पर सीढ़ीयो के द्वारा पहुंचा जा सकता है चारमीनार की मुख्य गैलरी में लगभग 45 लोग एक साथ आ सकते हैं

    essay on charminar in hindi
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    बाल मजदूरी

    बाल मजदूरी पर 300 शब्द में निबंध

    किसी भी देश में बाल श्रमिकों का होना उस देश की दुर्दशा दिखाता है जितनी भी बाल श्रमिकों की संख्या किसी देश में अधिक होगी उतना ही वह देश मुसीबतों का सामना करेगा,

    अगर भारत की बात करें तो यहां बाल श्रमिकों की संख्या बहुत ज्यादा है 2011 की जनगणना के आंकड़ों की बात करें तो भारत में हर 25वां बच्चा बाल श्रमिक है

    और अगर बाल श्रमिक की परिभाषा की बात करें तो कोई भी 14 साल से कम उम्र का बच्चा अगर किसी भी वजह से कोई शर्म करता है तो उसे बाल श्रम कहा जाएगा,

    किसी बच्चे के बाल श्रम करने की बहुत सारी वजह हो सकती है इसमें परिवार की गरीबी और माता पिता की अपने बच्चों के प्रति अनदेखी या उनका शिक्षा का अभाव भी हो सकता है

    बाल श्रम की वजह से बच्चा अपना बचपन जी नहीं पाता या कहें बाल श्रम में बच्चे का कोई बचपन नहीं होता,

    अगर कोई बच्चा अपने बचपन में श्रम करता है तो उसका शारीरिक तथा मानसिक विकास नहीं हो पाता क्योंकि ना तो बच्चा स्कूल जा पाता जिससे कि उसको आज के आधुनिक दौर के बारे में कुछ ज्ञान हो और कम उम्र में इतनी मेहनत करने से उसकी शारीरिक विकास दर भी प्रभावित होती है

    भारत में कुल एक करोड़ से ज्यादा बाल श्रमिक है जोकि बहुत से देशों की जनसंख्या से भी अधिक है

    बाल श्रमिक हमे हर जगह दिख जाते हैं चाहे कोई होटल हो या फिर कोई दुकान पर हम उन्हें अनदेखा कर देते हैं जिसकी वजह से सरकार की बाल श्रम रोकने की बहुत सारी योजनाएं आज तक सफल  नहीं हो पाई

    माता पिता को भी अपने बच्चों को बाल श्रमिकों के बारे में जानकारी देनी चाहिए नय की उनसे गृणा करनी चाहिए

    क्योंकि किसी का बाल श्रमिक होना उसकी गलती नहीं बल्कि उस समाज की गलती है जिसने उसे बाल श्रमिक बनाया.



    इन सभी बातों से आज हम यह प्रण लेते हैं कि किसी बाल मजदूर को घृणा की दृष्टि से नहीं देखेंगे और हमेशा उसकी मदद करेंगे बाल मजदूरी को कम करने के लिए तभी हमारा देश आगे बढ़ पाएगा

    child labour hindi essay
    child labour hindi essay

    यातायात के नियम

    यातायात के नियमों का पता होना न केवल सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक है बल्कि यह चालान और सजा से भी बचाते हैं अगर हम यातायात नियमों का पालन करेंगे तो इससे सड़क दुर्घटना में भारी कमी आएगी और सड़क पर चलना सुरक्षित बनेगा, सरकार द्वारा दुर्घटनाएं रोकने और नागरिकों को हानि से बचाने के लिए बहुत सारे कानून तथा नियम बनाए गए हैं जिनका उद्देश्य सड़कों पर अनुशासन बनाना तथा गैर जिम्मेदार या लापरवाह ड्राइवरों को चालान द्वारा सही मार्ग पर लाना है आज हम इन्हीं कुछ नियमों को पढ़ेंगे

    सड़क सुरक्षा नियम

    शराब पीकर वाहन चलाना

    शराब पीकर वाहन चलाना भारत में एक दंडनीय अपराध है जिस की अवहेलना करने पर वाहन चालक को जुर्माना तथा सजा हो सकती है इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति शराब पीकर या नशे की हालत में वाहन चलाने की कोशिश करता है तो वह भी दोषी माना जाएगा, अगर मोटरसाइकिल अधिनियम 1988 की 150 सी धारा की बात करें तो अगर किसी व्यक्ति के रक्त में 30 मिलीग्राम प्रति 100 मिलीग्राम से अधिक शराब की मात्रा पाई जाए तो वह दोषी ठहराया जाएगा अगर कोई व्यक्ति किसी नशे की हालत वाले व्यक्ति को वहां चलाने के लिए एप्स आता है या वाहन चलाने के लिए देता है तो वह भी उतना ही दोषी पाया जाएगा इतना की शराब पीकर वाहन चलाने वाला

    गति सीमा का उल्लंघन करना

    सड़क पर न्यूनतम तथा अधिकतम गति सीमा का उल्लंघन करना एक दंडनीय अपराध है और अगर कोई व्यक्ति इसका पालन नहीं करता तो वह दोषी ठहराया जाएगा क्योंकि अधिकतम गति वाले वाहन ना तो स्वयं नियंत्रण रखते हैं और सड़क पर चलने वाले बाकी वाहनों का भी नियंत्रण खराब करते हैं वहीं दूसरी ओर कम गति में वाहन चलाने वाला व्यक्ति सड़क पर यातायात को बाधित कर देता है अगर मोटरसाइकिल अधिनियम की बात करें तो उसकी धारा 183 के तहत किसी को तेज गति में वाहन चलाने के लिए प्रेरित करना भी एक दंडनीय अपराध है

    खतरनाक वाहन चालन

    सड़क सुरक्षा में चूक का एक और मुख्य कारण वाहन को खतरनाक तरीके से चलाना भी है इसी को ध्यान में रखते हुए मोटर यान अधिनियम की धारा 184 के तहत अगर कोई व्यक्ति सड़क पर अन्य वाहनों को सम्मान दिए बगैर खतरनाक और ऐसे तरीके से वहां चलाता है जिससे कि सड़क पर अन्य वाहन तथा पैदल चलने वालों के लिए जोखिम प्रकट हो तो वह दोषी माना जाएगा इसके अलावा किसी व्यक्ति को उसके महान को खतरनाक तरीके से चलाने के लिए उकसाने पर भी समान दंड का प्रावधान है

    हेलमेट ना पहनना

    दो पहिया वाहन चलाते हुए हेलमेट पहनना ना केवल सुरक्षा की दृष्टि से अच्छा है बल्कि यह दंड से भी बचाता है किसी भी श्रेणी की मोटरसाइकिल पर सवार चालक को हेलमेट का इस्तेमाल करना जरूरी है
    अगर किसी व्यक्ति को चिकित्सा अधिकारी द्वारा हेलमेट ना पहनने का परामर्श दिया गया है तो उसे हेलमेट पहनने से छूट मिल सकती है या फिर अगर कोई व्यक्ति पगड़ी धारी Sikh है तो उसे भी हेलमेट में छूट दी जाएगी

    मोबाइल फोन का इस्तेमाल

    अगर दो पहिया वाहनों की दुर्घटना का सबसे मुख्य कारण की बात करें तो वह मोबाइल का इस्तेमाल है ऐसा देखा गया है कि वाहन चलाते हुए भी व्यक्ति फोन उठाते हैं तथा उठाने के बाद भी वाहनुए बात करते रहते हैं इसके अलावा उनका ध्यान भी सड़क पर अच्छी तरह नहीं रहता और वह अन्य वाहनों के लिए परेशानी का कारण बन जाते हैं एक चीज को ध्यान में रखते हुए मोबाइल पर बात करना एक अपराध है

    वाहन चलाते समय धूम्रपान करना

    धूम्रपान का सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है और यह हानि कई गुना तक बढ़ जाती है जब कोई व्यक्ति वाहन चलाते समय धूम्रपान का सेवन करता है क्योंकि वह ना तो खुद अच्छी तरीके से सड़क पर अपना ध्यान रख पाता और बाकी लोगों को भी गलत संदेश देता है इसीलिए अगर कोई व्यक्ति वाहन चलाते हुए धूम्रपान करता है तो लाइसेंस प्राधिकारी वाहन चालक के लाइसेंस को अयोग्य घोषित कर सकता है

    दौड़ या गति प्रशिक्षण करना

    सड़क पर किसी भी तरह की वाहनों की दौड़ या उसका प्रशिक्षण करना गैरकानूनी है क्योंकि तेज गति से चलने वाले वाहन किसी के लिए भी हानिकारक हो सकते हैं और ऐसा देखा गया है कि एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में अक्सर चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं वाहनों की दौड़ की अनुमति केवल मानव के दौड़ स्थान पर ही दी जाएगी

    बिना पंजीकरण अथवा बीमा के वाहन चलाना

    किसी भी वाहन का बिना पंजीकरण कराएं उसका इस्तेमाल करना एक दंडनीय अपराध है परंतु ऐसा कोई वाहन अगर किसी आपदा के समय या फिर किसी को वश पताल पहुंचाने या दवाई लाने के लिए इस्तेमाल किया जाए तो वह दंडनीय अपराध नहीं माना जाएगा बस उसकी सूचना परिवहन अधिकरण के सचिव को देनी पड़ेगी, अगर किसी वाहन को बिना बीमा की भी चलाई जाए तो वह भी एक निर्णय अपराध कहलायेगा इसीलिए अपने वाहन का बीमा कराके‌ रखना चाहिए

    आपातकालीन वाहन

    सड़क पर एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए जरूरी है कि आपातकालीन वाहनों का सम्मान करें इसके लिए जब भी कोई आपातकालीन वाहन जैसे एंबुलेंस या अग्निशामक सेवा वाहन की आवाज सुने तो सड़क के एक किनारे हो जाना चाहिए आपातकालीन वाहन को देख कर संयम से काम ले और उसे रास्ता दें कई बार अचानक ब्रेक लगाना या फिर अचानक मोड़ भी सड़क सुरक्षा में बाधा डालता है कई बार देखा गया है कि नासमझ व्यक्ति आपातकालीन वाहन का पीछा करते हैं या फिर उसको ओवरटेक करने की कोशिश करते हैं ऐसा कभी नहीं करना चाहिए

    सुरक्षित ड्राइविंग के नुस्खे, सड़क सुरक्षा युक्तियाँ

    सड़क सुरक्षा


    आज की बढ़ती दुर्घटनाओं के माहौल में सड़क सुरक्षा और सुरक्षित ड्राइविंग के नुस्खे पता होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इसी की मदद से हम दुर्घटना जुर्माना चालान या किसी प्रकार के नुकसान अथवा किसी को सड़क पर परेशान किए बगैर अपने निर्धारित स्थान पर सुरक्षित पहुंच सकते हैं
    अगर सुरक्षित ड्राइविंग को सीधे शब्दों में कहें तो ज्ञान पूर्ण तथा जिम्मेदारी के साथ ड्राइविंग करना कोई भी ड्राइवर बस ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से अच्छा चालक नहीं बन जाता जब तक वह ड्राइविंग की महत्वपूर्ण तथा अच्छी बातों पर अमल ना करें
    इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम जिम्मेदार और सुरक्षित चालक बनने के कुछ नुस्खे बताएंगे जो सबके लिए अत्यंत सहायक होंगे

     सड़क सुरक्षा युक्तियाँ



    • ड्राइविंग करते वक्त हमेशा यातायात नियमों तथा संकेतों का अच्छी तरह पालन करना चाहिए अक्सर हम अगर कोई यातायात कर्मी देख रहा हो तभी सुरक्षा चिन्ह तथा संकेतों का पालन करते हैं अन्यथा गैर मौजूदगी में रेड लाइट पर भी रुकने से हिचकिचाते  हैं‌ अक्सर देखा गया है कि रेड लाइट की स्टॉप रेखा पर भी कुछ लोग धीरे-धीरे वाहन चलाते रहते हैं और जैसे ही लाइट हरी होती है अचानक से तेज रफ्तार में आगे बढ़ जाते हैं
    • अपने आसपास के यातायात की जानकारी लेने के लिए मिरर का इस्तेमाल करना चाहिए अक्सर देखा गया है कि ज्यादातर नौजवान मोटरसाइकिल के नीरज निकाल देते हैं जिससे कि उन्हें अपने आसपास के यातायात को देखने में अत्यंत परेशानी होती है
    • हमेशा बड़े वाहनों के ब्लाइंड स्पॉट्स से बाहर रहे क्योंकि उस जगह पर वाहन बड़ा होने की वजह से चालक नजर नहीं रख सकता और अगर इसके बारे में सावधान नए हो तो दुर्घटना हो सकती है
    • अपने वाहन को मुड़ते समय या वाहन को दूसरी लेन में बदलते समय सही संकेतों का इस्तेमाल करें जिससे कि किसी को परेशानी ना हो
    • वाहन को हमेशा सुरक्षित गति पर ही चलाएं हैं जोकि सड़क के हिसाब से निर्धारित की हो और मौसम तथा अन्य किसी परिस्थिति के अनुसार अपनी गति में परिवर्तन करें
    • कभी भी शराब तथा अन्य नशीले पदार्थों के प्रयोग के बाद वाहन ना चलाएं ना ही वाहन में इन पदार्थों का सेवन करें और अगर आप नींद या थकान महसूस कर रहे हो तो कभी भी वाहन मैं चलाएं इससे सड़क पर नियंत्रण नहीं रहता और ना ही हमारा मस्तिष्क अचानक आए किसी संकट में अनुकूल प्रतिक्रिया कर पाता है
    • फोन पर बात करना या वाहन में तेज आवाज में सीडी प्लेयर चलाना या फिल्म चलाना जैसे कार्य वाहन चलाते वक्त कभी भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह सब करने से ध्यान एकदम से बंद हो जाता है और यह सड़क पर अत्यंत खतरनाक साबित हो सकता है ज्यादातर दुर्घटनाओं में फोन पर बात करना दुर्घटना होने का मुख्य कारण पाया गया है
    • सड़क पर वाहन चलाते हुए कभी भी अपने सामने वाले वाहन से सटकर नहीं चलना चाहिए क्योंकि सामने वाले वाहन के एकदम प्रतिक्रिया से सड़क दुर्घटना हो सकती है हमेशा एक सुरक्षित अंतर बनाए रखें
    • वाहन को हमेशा अच्छी स्थिति में रखना चाहिए वहां की लड़कियां दर्पण तथा विंडस्क्रीन को निरंतर अंतराल के बाद साफ करना चाहिए इसके साथ ही टायरों में हवा के दबाव की भी नियंत्रण जांच कराते रहने चाहिए
    • आपातकालीन वाहनों को आगे जाने के लिए जगह देनी चाहिए और कभी भी उनका पीछा नहीं करना चाहिए अक्सर देखा गया है कि लोग आपातकालीन वाहनों के साथ रेस लगाने लगते हैं जो कि अत्यंत दंडनीय अपराध है जब भी आपातकालीन वाहनों सायरन अनसुने अपनी लेन बदल कर उसके लिए लेन खाली कर दे
    • सड़क पर चलने वाले सभी प्रकार के वाहनों तथा व्यक्तियों के साथ शिष्टाचार तथा समानता पूर्ण सड़क को साझा करना चाहिए ताकि सड़क पर सुरक्षित माहौल बन सके
    • कभी भी वाहन अत्यंत तेज गति में ना चलाएं और ना ही कभी आक्रमक ड्राइविंग करें हमेशा विनम्र रहे ताकि बिना कोई दुर्घटना के अपने तान पर सुरक्षित पहुंचा जा सके
    • वाहन चलाते हुए बच्चों को आगे की सीटों पर बैठाना असुरक्षित हो सकता है इसलिए उन्हें पीछे की सीटों पर बिठाए तथा वाहन शुरू करने से पहले ही सभी को सीट बेल्ट लगाने के लिए प्रेरित करें
    • वाहन में हमेशा प्राथमिक चिकित्सा किट रखें तथा पुरानी होने पर उसे बदल ले
    • अगर आप दुपहिया वाहन की सवारी कर रहे हैं तो हमेशा हेलमेट पहने अक्सर देखा गया है कि दुपहिया वाहन चालक हेलमेट पहनने में संकोच करते हैं
    • अक्सर देखा गया है कि बच्चे वाहन में छुपने के खतरों के बारे में अनजान रहते हैं और वह अक्सर वाहन की डिग्गी तथा वाहन की सीट के नीचे छुप जाते हैं इसलिए हमेशा बच्चों को वाहन में छपने के खतरों के बारे में बताएं अगर कोई बच्चा वाहन के आसपास से गायब हुआ है तो तुरंत डिग्गी चेक करें
    • अक्षर देखा जाता है कि अभिभावक बच्चों तथा पालतू जानवरों को वाहन में छोड़कर कुछ समय के लिए सामान खरीदने लग जाते हैं जो कि अत्यंत खतरनाक है चाहे आप कुछ ही समय के लिए वाहन से दूर हो फिर भी उन्हें अकेला न छोड़ें
    • स्कूल बसों तथा स्कूल के सामने हमेशा वाहन को कम गति में चलाएं अक्सर देखा जाता है कि अचानक बच्चे वाहन के सामने आ जाते हैं

    बाल मजदूरी

    बचपन के दिन भी बहुत खास होते हैं किसी ने बचपन में पढ़ाई में कारनामा क्या होता है किसी ने किसी अन्य जगहों में और बचपन के दिन हमेशा ही हमें उत्साह से भर देते हैं क्योंकि वह समय कुछ ऐसा होता है ना कोई सांसारिक चिंता और ना ही भविष्य का पता पर उनका क्या जिनका बचपन ही नहीं होता जी हां हम बात कर रहे हैं बाल मजदूरी की क्योंकि वह इस बदलते संसार में कहीं दूर रह जाते हैं.

    बाल मजदूरी पर निबंध क्यों महत्वपूर्ण है?

    बाल मजदूरी देश के लिए बहुत ही गंभीर समस्या है इसीलिए स्कूलों में इसके प्रति जागरूकता के लिए बहुत से कार्यक्रम चलाए जाते हैं इन्हीं में से एक है बच्चों को बाल मजदूरी पर निबंध लिखने के लिए प्रेरित करना क्योंकि जो वह बाल मजदूरी पर निबंध लिखेंगे तो उन्हें बाल मजदूरी का ज्ञान होगा और वह अपने समाज की इन बुराइयों को खत्म कर पाएंगे. हम भी इसका ध्यान रखते हैं इसलिए आपको  बाल मजदूरी से जुड़े हुए अलग अलग निबंध मिलेंगे आप अपने आवश्यकता अनुसार इन निबंधों को अपने कार्यक्रम में जोड़ सकते हैं.

    बाल मजदूरी 

    किसी बच्चे का अपने बचपन में मजदूरी करना बाल मजदूरी कहलाता है और उसकी उम्र 14 साल से कम हो, इसका मुख्य कारण अशिक्षा और गरीबी है, जब कोई मां-बाप अपने बच्चे का पेट भर पाने में असमर्थ रहता है तब हुआ है उन्हें बाल मजदूरी के दलदल में गिरा देता है ताकि वह कुछ आमदनी कर पाए और परिवार का गुजारा हो पाए, कई बार शिक्षा का अभाव होने की वजह से मां बाप शिक्षा को इतना तवज्जो नहीं देते मुल्की पैसे कमाने को तवज्जो देते हैं जिससे वह कम उम्र में ही अपने बच्चों को बाल मजदूरी करने की और धकेल देते हैं
    अगर बाल मजदूरी के आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली और यूपी में सबसे ज्यादा बाल मजदूर है यह दोनों मिलकर 2000000 से भी अधिक बाल मजदूर के मजदूरी की जगह बने हुए हैं
    इसके बाद बिहार राजस्थान महाराष्ट्र मध्य प्रदेश का नंबर आता है यहां भी बाल मजदूरी करने वालों की कमी नहीं है, बाल मजदूरी करने वालों में ज्यादातर लड़के होते हैं और लड़कियों को अक्सर घर के काम सोपे जाते हैं
    बाल मजदूरी के अभिशाप की वजह से बच्चे अपने बचपन में खेलकूद शिक्षा हंसी मजाक और स्नेह से दूर रहते हैं जिससे कि थोड़ा बड़ा होने पर उन्हें कॉफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ज्यादातर देखा गया है
    इसके अलावा उन्हें काफी बीमारियां भी जकड़ लेती है खासकर जिन्होंने फैक्ट्रियों या कोयले य हीरे की खदानों में काम किया होता है
    बाल मजदूरी किसी भी देश के लिए बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि बच्चे वह सुंदर पौधा है जो बड़ा होकर पेड़ बनेगा और उसके फल से सभी को लाभ होगा, इसलिए बचपन की परवरिश और शिक्षा देश को आगे बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है सरकार के बहुत सारे कानून और उपाय के बाद भी बाल मजदूरी की समस्या कम नहीं हुई है क्योंकि जब तक देश का आम नागरिक जागरूक नहीं होगा तब तक कोई भी योजना या कानून अच्छी तरह काम नहीं कर सकता इसीलिए हमें इसके प्रति जागरूक होना पड़ेगा, खासकर बच्चों को जो शिक्षा ले रहे हैं और जी ने अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए की बहुत सारे इन चीजों के अभाव में है और हमें बढ़ा आदमी बनकर इन सबको दूर करना है ताकि देश सभी के रहने के लिए अच्छी जगह बन पाए.

    बाल मजदूरी के क्या कारण है जिनसे एक बच्चा मजदूरी करने लगता है


    बाल मजदूरी किसी एक वजह से नहीं होती बहुत सारी चीजें या कारण होते हैं जब कोई बच्चा मजदूरी शुरू करता है आज इनमें से कुछ बाल मजदूरी के कारण देखेंगे
    सबसे पहला कारण गरीबी होता है क्योंकि जब किसी के पास खाने के लिए खाना पहनने के लिए कपड़े और रहने के लिए मकान ना हो तो वह अपने बच्चों को मजदूर के रूप में देखता है
    दूसरा मुख्य कारण स्कूलों का अभाव और सरकार की अनदेखी है आज भी 80 हजार से ज्यादा ऐसी स्कूल है जिनमें ब्लैक बोर्ड नहीं है और लगभग 40000 स्कूलों में पक्की बिल्डिंग नहीं है जिससे कि आप समझ ही सकते हैं कि किसी का स्कूल में जाने का कैसे मन करेगा
    परिवारों का लालच भी बाल मजदूरी का मुख्य कारण है आज भी 25 से 40% परिवार की आमदनी बाल मजदूर करते हैं जिससे कि परिवार को बाल मजदूरी अच्छी लगने लगती है और वह अपने बच्चों को बाल मजदूरी के लिए नहीं रोकते इसके अलावा कई बार बाल मजदूर पैसों का लालच करने लग जाता है और इस मजदूरी की दलदल में पता चला जाता है
    अन्य कारणों की बात करें तो बाल मजदूरी का एक और मुख्य कारण सस्ती मजदूरी है बहुत सारे बाल मजदूर को दुकानों और फैक्ट्रियों में इसलिए रख लिया जाता है क्योंकि वह एक वैशक की तुलना में बहुत कम मजदूरी लेते हैं इससे दुकान और फैक्ट्री मालिक भी लालच कर लेते हैं और बच्चों को मजदूरी पर रख लेते हैं
    इसके अलावा लोगों का जागरूक ना होना भी बाल मजदूरी का एक मुख्य कारण है आमतौर पर हम किसी भी बाल मजदूर को किसी दुकान होटल है फैक्ट्री में देखकर आसानी से अनदेखा कर देते हैं इसकी वजह से यह एक आम बात सी बन चुकी है पर हम भूल जाते हैं कि अगर हमारे साथ ऐसा हुआ होता तो आज हम इस जगह नहीं होते हैं और समाज में हमारा क्या स्थान होता.

    बाल मजदूरी के क्या परिणाम हो सकते हैं किसी देश के लिए



    अगर बाल मजदूरी के परिणाम की बात करें तो इसके अत्यंत भयानक परिणाम है जिससे कोई देश बहुत अधिक प्रभावित होता है
    सबसे बड़ा बाल मजदूरी का यह नतीजा निकलता है कि देश अशिक्षित रह जाता है जो लोग अपने बच्चों से बाल मजदूरी कराते है वह ज्यादातर अशिक्षित होते हैं और फिर बाल मजदूरी के वजह से बच्चे भी अशिक्षित रह जाते हैं इस तरह देश का एक कस्बा कभी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता और आज के आधुनिक युग में अगर कोई अशिक्षित है तो अभय तेजी से बदलती दुनिया में कहीं टिक नहीं पाता
    अगर बाल मजदूरी के परिणामों की बात करें तो इसमें बच्चों का शोषण भी आता है ज्यादातर बच्चे जो बाल मजदूरी करते हैं कभी ना कभी शोषण का शिकार हो ही जाते हैं जिनसे उनकी मानसिकता पर काफी प्रभाव पड़ता है
    अगर कोई बच्चा बाल मजदूरी करता है तो उसका शारीरिक और मानसिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है और किसी भी देश या प्रदेश के लिए यह बहुत बुरी की बात है की उनके बच्चों का विकास ना होना
    बाल मजदूरी करने वाला बच्चा ज्यादातर अपनी शारीरिक जरूरत है कम आहार प्राप्त करता है जिससे कि कुपोषण का शिकार आसानी से हो जाता है
    बाल मजदूर से देश में असमानता पैदा होती है बहुत सारे लोग जो पहले से ही अमीर है वह और अमीर बनते जाते हैं और जो वर्ग बाल मजदूरी की जकड़ में है वह हमेशा गरीब रहता है अगर भारत की बात करें तो भारत में है ऐसा मानता बहुत ज्यादा है किसी समूह पर धन का बहुत बड़ा हिस्सा है तो किसी के पास जीवन व्यापन करने के लिए भी धन नहीं है


    बाल मजदूरी खत्म करने के लिए क्या उपाय बरतने चाहिए



    बाल मजदूरी अगर सच में ही खत्म करनी है तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी क्योंकि जब तक सोच नहीं बदलेगी तब तक समाज नहीं बदलेगा माता पिता को अपने बच्चों के प्रति जागरूक होना उन्हें यह समझना पड़ेगा कि जो गरीबी उन्होंने बचपन में देखी है कम से कम अपने बच्चे को अच्छी तरह पढ़ा लिखा करो बुढ़ापे में तो यह गरीबी ना देखें और लोगों को भी बाल मजदूर के प्रति घृणा भरा भाव खत्म करना पड़ेगा और उनसे सहानुभूति रखनी पड़ेगी जितना हो सके बाल मजदूर की सहायता करनी चाहिए जिससे की उसका बचपन सुरक्षित रहे
    सरकार को बाल मजदूरी के कानून और कठिन करने पड़ेंगे जिससे कि कोई भी व्यक्ति अपने पास बाल मजदूर रखते हुए कम से कम दो बार तो जरूर सोचें इसके साथ ही फैक्ट्री और दुकानदारों को भी जागरूक होना पड़ेगा उन्हें सोचना पड़ेगा कि अगर किसी बाल मजदूर की जगह उनका बच्चा होता तो फिर उनका क्या भविष्य होता
    सरकारों को चाहिए कि देश के पिछड़े इलाकों में स्कूलों का प्रबंध कराएं और जागरूकता अभियान चलाएं जिसमें शहरी स्कूलों के बच्चों को भी जोड़ा जाए जिस से प्रेरित होकर कम से कुछ बच्चों में तो पढ़ने की लालसा जागे और इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति भी हो
    अध्यापकों को भी चाहिए कि वह अपना कर्तव्य अच्छी तरह निभाए देश के बहुत सारे इलाकों में यह देखा गया है कि जादर सरकारी स्कूलों के अध्यापक समय पर स्कूल नहीं आते और ना ही बच्चों को अच्छी तरह बनाते हैं जिससे कि बच्चों का भी स्कूल जाने का मन नहीं करता और उनका ध्यान कि नहीं और चीजों की तरफ जाता है

    बाल मजदूरी निबंध से हमें क्या सीखने को मिलता है


    आखिर में अगर हम बाल मजदूरी का निष्कर्ष निकालें तो पता चलता है कि इससे कहीं पर भी कोई फायदा नहीं होता दो तीन हजार रुपए की बचत के लिए दुकानदारों और फैक्ट्रियों का बाल मजदूरों को रखना देश को करोड़ों अरबों रुपए का नुकसान कर आता है बचपन किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत ही जरूरी समय है इसको व्यर्थ नहीं करना चाहिए और आज हमको पढ़ लेना चाहिए कि कहीं भी अगर बाल मजदूर दिखे तो उससे नजर चुराने की बजाय उसकी सहायता करनी चाहिए क्या पता आपसे कुछ बहुत अच्छा हो जाए

    डॉक्टर अम्बेडकर पर 10 लाइनें

    10 lines on Dr. Ambedkar in Hindi 

    1. डॉक्टर बी आर अंबेडकर का पूरा नाम भीमराव रामजी आंबेडकर है उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 में मध्य प्रदेश राज्य में हुआ था अक्सर उन्हें बाबासाहेब अंबेडकर के नाम से भी पुकारा जाता है

    2. डॉक्टर अंबेडकर पहले भारतीय थे जिन्होंने इकोनॉमिक्स में डॉक्टरेट की उपाधि किसी विदेशी संस्था से प्राप्त करी

    3. डॉक्टर अंबेडकर भारतीय संविधान के निर्माता कहे जाते हैं क्योंकि वह कॉन्सीट्यूशनल ड्राफ्टिंग कमिटी जिसको भारत का संविधान बनाने की जिम्मेवारी सौंपी गई थी उसके चेयरमैन थे

    4. डॉक्टर अंबेडकर की माता का नाम भीमाबाई रामजी सकपाल तथा उनके पिता का नाम रामजी मलोजी सकपाल था Dr Ambedkar के पिता ब्रिटिश इंडिया की आर्मी में मेजर थे

    5. डॉक्टर अंबेडकर की शादी सन 1996 रमाबाई आंबेडकर से हुई लेकिन खराब सेहत की वजह से 1975 में उनका निधन हो गया उसके बाद डॉक्टर अंबेडकर ने सविता अंबेडकर से 1948 में विवाह किया

    6. डॉक्टर अंबेडकर ने महिला सुधार तथा मजदूरों के लिए बहुत अधिक काम किया तथा उनको उनके अधिकार दिलाने में मदद की

    7. डॉक्टर अंबेडकर में भारत में हो रहे जातिगत भेदभाव तथा समाज में गरीब लोगों के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ काफी आवाज उठाई इसलिए आज भी गरीब तथा दलित लोग उनका इतना सम्मान करते हैं

    8. डॉक्टर अंबेडकर आजाद भारत के पहले कानून मंत्री बने

    9. डॉक्टर आंबेडकर  दिसंबर 1950 को बीमारी की वजह से सोते-सोते स्वर्ग सिधार गए वह डायबिटीज तथा अन्य कई बीमारियों से काफी समय से ग्रसित थे

    10. सन 1990 में भारत सरकार ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा किए गए कार्यों के लिए उन्हें  भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया

    स्टेचू ऑफ यूनिटी

     स्टेचू ऑफ यूनिटी पर निबंध

    स्टेचू ऑफ यूनिटी या कहे एकता की मूरत भारत के गुजरात राज्य के नर्मदा जिले में स्थित सरदार सरोवर बांध के समीप बनाई गई दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई 182 मीटर या 597 फीट है जो कि दुनिया में सबसे अधिक है

    प्रतिमा का निर्माण कार्य 31 अक्टूबर 2014 को श्री सरदार पटेल जी के जयंती दिवस पर प्रारंभ हुआ था और 31 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा इसका उद्घाटन अत्यंत भव्य तथा शानदार तरीके से किया गया

    प्रतिमा का नाम स्टैचू ऑफ यूनिटी सरदार पटेल जी द्वारा भारत को एक करने के किए गए प्रयासों की वजह से रखा गया क्योंकि आजादी के वक्त भारत अलग अलग रियासतों के अधीन था और अगर वह  अपने हिसाब से शासन चलाते तो भारत आज के समय इतना बड़ा देश ना होकर छोटे-छोटे अलग देशों में बटा होता

    यह सरदार पटेल जी के प्रयास ही थे जिनकी वजह से भारत इतनी धर्मो विविधताओं संस्कृति तथा भाषा का देश होते हुए भी एक साथ आज तक बना हुआ है दुनिया में ऐसा कोई भी देश नहीं है जहां भारत जितनी भाषाएं बोली जाती हो या फिर भारत जितनी संस्कृति कहीं पर मौजूद हो और यह सब सरदार पटेल जी की वजह से ही मुमकिन हो पाया

    सरदार पटेल जी का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नांदेड़ में हुआ जो उस समय अंग्रेजों के अधीन भारत के मुंबई कार्यक्षेत्र के अंदर आता था आज नांदेड़  गुजरात राज्य में स्थित है

    आजादी में अपना योगदान तथा भारत को एक करने में सरदार जी द्वारा लिए गए कार्य की वजह से उन्हें लोह पुरुष का दर्जा दिया गया लेकिन सरदार जी आजादी के बाद ज्यादा समय तक जीवित नहीं रह पाए और 15 दिसंबर 1950 को मुंबई में हार्ट अटैक की वजह से सरदार जी का निधन हो गया उनके निधन से पूरे देश को गहरा नुकसान हुआ लेकिन हमें इस महापुरुष के कार्य को नहीं भूलना चाहिए इसी का ध्यान रखते हुए स्टेचू ऑफ यूनिटी जैसे भव्य तथा विशाल  का निर्माण कराया गया

    स्टैचू ऑफ यूनिटी की ऊंचाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके बाद मुझे दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा स्टैचू स्प्रिंग टेंपल बुद्धा जो चाइना में है उसकी उचाई 153 मीटर है

    अगर हम स्टेचू ऑफ यूनिटी की ऊंचाई को उसके आधार से मापे तो यह  758 मीटर तक पहुंच जाती है स्टैचू ऑफ यूनिटी को बनाने के लिए पहले देश के कोने-कोने से लोहा इकट्ठा कर उसे स्टेच्यू बनाने की बात हुई थी इसके मद्देनजर लगभग 5000 TON से भी अधिक लोहे को 3 महीने के अंदर इकट्ठा किया गया लेकिन बाद में स्टैचू की गुणवत्ता में इसके असर को देखते हुए इस लोहे का इस्तेमाल स्टैचू के आसपास के निर्माण कार्यों के लिए के जाना ही उचित समझा गया

    स्टैचू ऑफ यूनिटी देखने में अत्यंत भव्य है और इसके पास पहुंचने के लिए एक ब्रिज बनाया गया है जो सीधे स्टैचू ऑफ यूनिटी के आधार तक लेकर जाता है इसके अलावा स्टेचू ऑफ यूनिटी के आसपास होटल रूम गार्डन बनाकर इसको एक आकर्षक टूरिस्ट स्थान बनाया जा रहा है जिससे कि इसकी महत्वता पूरी दुनिया में फैले

    स्टैचू ऑफ यूनिटी बनाने में काफी रिसर्च तथा इंजीनियरिंग की मदद ली गई जिससे कि यह है इतना ऊंचा निर्माण संभव हो पाया स्टैचू ऑफ यूनिटी काफी तेज हवाओं तथा हाई तीव्रता के भूकंप को भी झेल सके इसका भी मुख्य रूप से ध्यान दिया गया

    इसके लिए मजबूत रेन फॉर सीमेंट कंकरीट ( RCC) तथा हाई क्वालिटी के स्टील का इस्तेमाल किया गया सबसे पहले एक मजबूत नींव का निर्माण किया गया जिसके लिए वहां की मिट्टी की गुणवत्ता के भी अच्छी तरह जांच की गई इसके बाद दो रेन फोर्स कंक्रीट के स्तंभों के इर्द-गिर्द सरदार पटेल जी के ढांचे का निर्माण किया गया

    Statue of Unity Hindi Essay Conclusion 

    सरदार पटेल जी के साथ साथ इस बात का भी गर्व करना चाहिए कि दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा भारत मैं स्थित है क्योंकि दुनिया के बहुत सारे स्टेच्यू ऐसे हैं जो उन देशों की पहचान बने हुए हैं तथा हर साल हजारों लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं जिसकी वजह से वह क्षेत्र समृद्ध बनता है तथा आसपास के लोगों को रोजगार मिलता है हमें भी इसका प्रचार करना चाहिए तथा स्टैचू ऑफ यूनिटी का सम्मान करना चाहिए

    जल प्रदूषण और उसके कारण

    सतही जल और भूमिगत जल 


    सतही जल से तात्पर्य वह जल जो धरती की सतह के ऊपर मौजूद होता है जैसे की कुओं झीलों तथा नदियोंं में पाए जाने वाले जल को हम सतही जल कहेंगे यह जल अलग-अलग कारणों से प्रदूषित हो सकता है जैसे कि फैक्ट्रियों के कचरे जानवरों के मल पेस्टिसाइड या फिर किसी रसायनिक पदार्थ की मदद से |
    सतही जल का मुख्य कारण बारिश या बाढ़ के पानी का एक जगह पर इकट्ठा हो जाना है अगर स्थाई जल के सबसे बड़े स्थान की बात करें तो वह समुंद्री जल है |

    अगर भूमिगत जल की बात करें तो यह वह जल है जो धरती के अंदर मौजूद होता है और हम इसे हैंड पंप की मदद से बाहर निकालते हैं भूमिगत जल स्त्रोत तब बनते हैं जब लंबे समय तक भूमि द्वारा जल को सोखा जाता है तथा उसके बाद जल एक ऐसी जगह पर जाकर इकट्ठा हो जाता है जहां के नीचे पथरीली सतह होती है ताकि जल कहीं और ना जा पाए और धीरे-धीरे जल यहां इकट्ठा होकर एक भूमिगत जल स्त्रोत बना देता है

    जल प्रदूषण 


    आज के आधुनिक युग ने हमारा रहना काफी सरल बनाया है जितनी प्रगति हमने पिछले 100 सालों में की है उतने तो शायद हजार सालों में भी नहीं की होगी आज बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों मैं हमारी जरूरत के सारे सामान आसानी से निर्मित हो जाते हैं यातायात के साधनों की वजह से आज हम कुछ ही पलों में देश के एक कोने से दूसरे कोने में पहुंच सकते हैं वैज्ञानिक पद्धति की वजह से हम आज कम समय में ज्यादा पैदावार कर सकते हैं लेकिन हमारी इन बढ़ती जरूरतों की वजह से हमने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया है इनमें से एक है जल जिस के बगैर धरती पर जीवन की कल्पना करना भी नामुमकिन है लेकिन तरक्की की रफ्तार में हमने जल संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जिसके कारण आज पीने लायक जल की मात्रा लगातार घट रही है

    अगर जल प्रदूषण की बात करें तो रसायनिक तथा विषैले पदार्थों का किसी भी माध्यम की वजह से स्वस्थ जल में मिलकर उसकी उपयोगिता को कम या खत्म करना जल प्रदूषण कहलाता है जिसका मुख्य कारण घरों,उद्योग धंधों के कचरे का सीधे तथा किसी माध्यम की वजह से जल में प्रवेश करना

    आज फैक्ट्रियों से निकलने वाले विषैले पदार्थ सीधे जल स्रोतों जैसे नदियों तथा झीलो में प्रवेश कर रहे हैं जोकि नए केवल उसे मनुष्य के लिए जहरीला बना रहे बल्कि जल में रहने वाले जीबी उसका शिकार हो रहे हैं यहां तक की नदियों के किनारे वाले गांव तथा पेड़ पौधे इसकी चपेट में आ रहे हैं

    अगर कृषि क्षेत्र की बात करें तो खाद्य पदार्थों की बढ़ती जरूरत की वजह से आज भूमि का अत्यधिक दोहन हो रहा है आज किसान अपनी पैदावार को बढ़ाने के लिए तरह-तरह के रासायनिक पदार्थों का खेतों में छिड़काव कर रहे हैं और जब यह रसायनिक पदार्थ सत्यही जल के साथ मिलकर हमारे भूमि में प्रवेश करते हैं तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता को तो घट आते ही है उसके साथ साथ भूमि ए जल को भी दूषित करते हैं
    कृषि में इस्तेमाल होने वाले इन रसायनिक पदार्थों की वजह से आज नए केवल तरह-तरह की बीमारियां सामने आ रही है
    जल प्रदूषण का सबसे गहरा असर तो जल में रहने वाले जीव जंतुओं पर पड़ा है आज नदियों तथा झीलों में रहने वाले जीवो की संख्या लगातार घट रही जिससे की प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है

     भूजल के अत्यधिक दोहन की वजह से आज उसका स्तर लगातार घटता जा रहा है कई जगह पर तो यह बहुत ही खतरनाक रूप से नीचे गया हें जिससे कि कई जगह पर तो पीने का पानी भी आसानी से नहीं मिल पा रहा आज गांवों में मौजूद कुए तथा तलाब लगभग लुप्त हो चुके हैं या फिर विलुप्त होने की कगार पर है और इसका एक ही कारण है जल का आवश्यकता से अधिक उपयोग,

    और इसके परिणाम अत्यंत गंभीर है जल के मौजूद ना होने की वजह से उस क्षेत्र में कृषि करना काफी कठिन हो चुका है आज जल ना होने की वजह से लोग अपने क्षेत्रों से पलायन करके दूसरे क्षेत्र में जा रहे हैं

    इसके अलावा जब नदियों का प्रदूषित जल समुद्री पानी से मिलता है तो वह उसे भी दूषित करता है जिससे कि समुद्री जीवों के प्रजातियां तथा समुद्री वनस्पति पर गंभीर खतरा मंडराता जा रहा है अक्सर यह भी देखा गया है कि तेल से भरे जहाज अक्सर समुंदर में डूब जाते हैं या फिर कुछ हादसे की वजह से तेल का रिसाव हो जाता है जिससे कि सैकड़ों टन तेल समुंदर में फैल जाता है जो कुछ ही पल में लव कुश मंत्री जी वो के लिए काल बन जाता है इसके अलावा वह जल को बहुत अधिक मात्रा में प्रदूषित कर देता है

    इसके अलावा गांवों में यह देखा गया है कि लोग जल स्त्रोतों के पास अपने कपड़े धोते हैं स्नान करते हैं तथा अपने पशुओं को भी वही नहलाते हैं अक्सर पशु जल में ही गोबर कर देते हैं इन सभी कारणों की वजह से जल प्रदूषित हो जाता है


    जल प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार द्वारा चलाई गई विभिन्न योजनाएं जो नदियों तथा झीलों को साफ करने के लिए बनाई गई थी बुरी तरह से नाकामयाब रही है इसका मुख्य कारण जल प्रदूषण का खतरनाक स्तर पर पहुंचना है

    वहीं लोगों का जल प्रदूषण के प्रति जागरूकता का न होना भी एक मुख्य कारण है क्योंकि जब तक लोग जागरुक नहीं होंगे तब तक इस समस्या का समाधान निकाला लगभग नामुमकिन है क्योंकि जल को प्रदूषित करने में हम सबकी भागीदारी एक समान ही है और इसके बुरे प्रभाव भी हमें ही भुगतना पड़ रहे हैं तो आज हमें यह प्रण लेना पड़ेगा की जल का उपयोग आवश्यकता अनुसार ही करेंगे और जल में कूड़ा कचरा नहीं डालेंगे क्योंकि एंजल होगा तभी हम होंगे

    सतही जल प्रदूषण और भूमिगत जल प्रदूषण


    सतही जल से तात्पर्य वह जल जो धरती की सतह के ऊपर मौजूद होता है जैसे की कुओं झीलों तथा नदियोंं में पाए जाने वाले जल को हम सतही जल कहेंगे यह जल अलग-अलग कारणों से प्रदूषित हो सकता है जैसे कि फैक्ट्रियों के कचरे जानवरों के मल पेस्टिसाइड या फिर किसी रसायनिक पदार्थ की मदद से,
    सतही जल का मुख्य कारण बारिश या बाढ़ के पानी का एक जगह पर इकट्ठा हो जाना है अगर स्थाई जल के सबसे बड़े स्थान की बात करें तो वह समुंद्री जल है
    अगर भूमिगत जल की बात करें तो यह वह जल है जो धरती के अंदर मौजूद होता है और हम इसे हैंड पंप की मदद से बाहर निकालते हैं भूमिगत जल स्त्रोत तब बनते हैं जब लंबे समय तक भूमि द्वारा जल को सोखा जाता है तथा उसके बाद जल एक ऐसी जगह पर जाकर इकट्ठा हो जाता है जहां के नीचे पथरीली सतह होती है ताकि जल कहीं और ना जा पाए और धीरे-धीरे जल यहां इकट्ठा होकर एक भूमिगत जल स्त्रोत बना देता है

    आज अलग-अलग कारणों की वजह से स्थाई जेल और भूमिगत जल दोनों ही बहुत तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं अगर स्त्री जल प्रदूषण की बात करें तो वह हमें रोजाना की दिनचर्या में देखने को मिलता है शहरों तथा महानगरों से निकलने वाला शिविर की पाइप सीधे नदियों तथा तालाबों में गिरती है जो कि जल को प्रदूषित करते ही है उसके साथ ही उसमें बहुत सारे बैक्टीरिया पनपते हैं और मच्छर इनमें अपना लारवा देते हैं जो बाद में इंसानों में तरह-तरह की बीमारियां पैदा करते हैं इसके साथ-साथ फैक्ट्रियों से निकलने वाला खतरनाक कचरा और यहां तक कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से बी बचा हुआ अवशेष को सीधे जल स्त्रोतों में बहा दिया जाता है वहीं दूसरी ओर कृषि में इस्तेमाल होने वाले तरह-तरह के रसायनिक पदार्थ जो पैदावार को पढ़ाते हैं वह जल और भूमि दोनों दोनों को प्रदूषित कर रहे हैं जिससे भूमि की उपजाऊ समता तो कम हो ही रही है उसके साथ साथ इस भूमि पर पनपने वाले फल तथा सब्जियों के सेवन से भी मनुष्य को भी बीमारियां लग रही है

    वहीं दूसरी और भूमिगत जल प्रदूषण की बात करें तो उसका एक मुख्य कारण स्थाई जलता प्रदूषित हो ना तो है ही क्योंकि स्पीजल प्रदूषित होकर धीरे धीरे नीचे जाता है और धरती में मौजूद जल को भी दूषित कर देता है वहीं इश्के अन्य कारण पावर प्लांट से निकलने वाला सल्फर डाइऑक्साइड, और फैक्ट्रियों से निकलने वाला अमोनिया और स्टर्जन शामिल है

    भूमिगत जल के कारणों का सीधे तौर पर पता लगाना तथा उनका रोकथाम करना काफी मुश्किल है सही जल के मुकाबले क्योंकि इसका हम सीधे तौर पर अध्ययन नहीं कर सकते

    होली पर 10 लाइनें

    10 Lines on Holi Festival in Hindi

    1. होली या रंगो का त्योहार प्रत्येक वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है

    2. होली हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है

    3. होली का नाम हिरण्यकश्यप की बहन होलीका के दहन की खुशी में मनाया जाता है

    4. होली का त्यौहार पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है हर साल लाखों पर्यटक होली मनाने भारत आते हैं खासकर पिछले कुछ सालों से होली का त्योहार विदेशों में बहुत तेजी से प्रसिद्ध हुआ है

    5. होली का त्यौहार पिछली सभी मन मोटाव भुलाकर दोबारा नई शुरुआत करने का संदेश देता है

    6. होली के दिन सभी सुबह ही एक दूसरे को रंग लगाने लग जाते हैं और तरह तरह के कार्यक्रम का आयोजन करते हैं

    7. होली पर एक दूसरे को रंग लगाते हुए सावधानी बरतनी चाहिए और अच्छी गुणवत्ता के रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए


    8. होली पर अक्सर लोन तेज रफ्तार में वाहन चलाते हुए जाते हैं जिससे दुर्घटना होने का खतरा बढ़ जाता है हमें होली पर सावधानी से काम लेना चाहिए

    9. कुछ लोग होली पर नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं जोकि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है इसलिए ऐसे लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए

    10. होली के दिन काफी मात्रा में जल स्त्रोतों का गैर जिम्मेदारउपयोग होता है इसलिए जितना हो सके कम जल का इस्तेमाल करना चाहिए

    Holi essay in Hindi
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    पर्यावरण

    पर्यावरण पर निबंध

    हमारे आसपास मौजूद सभी जीवित और निर्जीव चीजों के मेल को हम पर्यावरण कहते हैं पर्यावरण में सभी तरह के जीव जंतु, पेड़ पौधे तथा वायुमंडल में मौजूद विभिन्न प्रकार की गैस  शामिल है यहां तक की सूर्य का प्रकाश भी हमारे पर्यावरण बनाने में एक मुख्य घटक है अगर सौरमंडल में बाकी ग्रह की बात करें तो केवल धरती पर ही एक सुरक्षित पर्यावरण मौजूद है जिसमें जीवन पनप सकता है |

    हजारों सालों से यह पर्यावरण मानव जीवन की रक्षा कर रहा है तथा इसी की वजह से आज हम इतने विकसित हो पाए हैं पर्यावरण में मजबूत ऑक्सीजन गैस से हम सांस लेते हैं जो किया जीवन का मूलभूत स्त्रोत है इसके अलावा पेड़-पौधे से हम तथा जीव जंतु फल जड़ी बूटी लेते हैं

    प्रकृति का यह अद्भुत संतुलन केवल हमारे पर्यावरण की वजह से ही मुमकिन हो पाया है लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मनुष्य ने तरक्की की होड़ में पर्यावरण को बुरी तरीके से प्रभावित किया है वाहनों से निकलता हुआ जहरीला धुआं लगातार हमारे पर्यावरण में गुल करे से दूषित कर रहा है पेड़ों की लगातार कटाई की वजह से जीव जंतु के रहने और उनके खाने का संतुलन बिगड़ रहा है

    पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की वजह से भूमि का कटाव एवं सुरक्षित हवा की कमी लगातार नहीं हो रही है इसके अलावा पेड़-पौधे पर निर्भर जीवो को पर्याप्त मात्रा में आहार मिलने में कठिनाई हो रही है और उनका आवास भी जा रहा है जिससे मांसाहारी जीव भी प्रभावित हो रहे हैं  इससे संपूर्ण आहार प्रणाली की श्रंखला को नुकसान पहुंच रहा है जोकि धरती पर जीवन को चलाने के लिए बहुत अत्यधिक जरूरी है

     इसके लिए हमें जागरूक होने के जरूरत है ताकि हम तथा हमारे आने वाला भविष्य एक सुरक्षित पर्यावरण में जीवन यापन कर सके इसके लिए हमें जितना हो सके अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए तथा वाहन का इस्तेमाल तभी करना चाहिए जब अत्यंत जरूरी हो क्योंकि इनसे निकलने वाला धुआं एवं ध्वनि पर्यावरण की प्रदूषित करने का एक मुख्य स्रोत है

    essay on environment in hindi
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    मोर

    मोर पर निबंध हिंदी में संक्षिप्त जानकारी के साथ

    मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है अपनी सुंदरता और धार्मिक महत्व की वजह से यह भारत की संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है भारतीय उपमहाद्वीप में मुख्य रूप से हरे और नीले रंग के मोर पाए जाते हैं अगर भारत की बात करें तो यहां नीले रंग के मोर मौजूद है |


    Peacock image

    मोर की सुंदरता हमेशा से ही कलाकृतियों की पहचान रही है प्राचीन काल से ही मोर के सिक्के, मोर के चित्र के साथ बनी कलाकृतियां तथा वस्त्रों पर छापी गई मोर की आकृति मोर का एक विशेष स्थान दिखाती है मोर पक्षी के बारे में, यह बताता है कि मोर प्राचीन काल से ही आकर्षण का केंद्र रहा है |

    मोर के सिर पर मुकुट रूपी कलंगी होने के कारण इसको पक्षियों का राजा भी कहा जाता है मोर की शारीरिक बनावट अत्यंत सुंदर होती है लंबी नीली गर्दन मोर को एक विशेष पहचान दिलाती है मोर के लंबे पंख होते हैं जिन पर हरे नीले पीले रंग के  छोटे-छोटे निशान बने होते हैं जो दिखने में किसी सुंदर आंख जेसे लगते हैं जो अत्यंत सुंदर होते हैं

    beautiful blue Peacock image


    मोर का नृत्य अनेक कविताओं की शोभा बढ़ा चुका है आमतौर पर मोर वर्षा  मौसम के दौरान नृत्य करते हैं जो मुख्य रूप से मादा मोरनी को लुभाने के लिए जरूरी है इस दौरान मोर के पंखों का आकार दिखने में अर्धचंद्र जैसा प्रतीत होता है और इनका फैलाव 1 मीटर तक हो जाता है इस समय मोर तेज गति से आवाज निकालते हैं जिसका स्वर अत्यंत सुरीला होता है मोर इंसानों के साथ रहने वाले पक्षी नहीं है और यह इंसानों से दूर रहना पसंद करते हैं इसीलिए नृत्य इंसान की आवाज से दूर ही होता है |

    नृत्य के दौरान कुछ पंख उस जगह पर गिर जाते हैं जिनको उठाकर बाद में विभिन्न तरह के कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है जिनमें पंखों से सजावट अथवा उनका हमारे धार्मिक कार्यों में इस्तेमाल शामिल है

    मोर के पंखों को शुद्ध माना जाता है जी ने किसी को आशीर्वाद देते हुए उनके ऊपर से फेरा जाता है मोर का हिंदू धर्म में एक विशेष महत्व है भगवान कृष्ण अपने मुकुट पर मोर के पंखों का इस्तेमाल करते है इसके अतिरिक्त भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है जो मोर के महत्व को स्पष्ट रूप से दिखाता है |

    मोर के जीवन का कार्यकाल मुख्य रूप से 10 वर्ष से 25 वर्ष तक का होता है कुछ मोर 40 वर्ष तक भी जीवित रह सकते हैं मोर खेतों में मौजूद कीड़े मकोड़े खाते हैं इसके अलावा वे खेतों में मौजूद सांपों का भी शिकार कर लेते हैं खेतों में किए गए इन सब कार्यों के लिए मोर को किसानों का मित्र भी अक्सर कहा जाता है

    मोर अधिक वजन वाले पक्षियों की श्रेणी में आते हैं और इसी अधिक वजन की वजह से मोर ज्यादा समय तक उड़ नहीं पाते और ना ही प्रवासी पक्षियों की तरह ज्यादा दूर जा पाते हैं अगर मोर के सामान्य वजन की बात करें तो यह लगभग 5 से 10 किलोग्राम तक का हो सकता है

    अगर मोर मोरनी की तुलना करें तो मोरनी दिखने में मोर की तरह ज्यादा सुंदर नहीं होती इसके पंखों का आकार भी मोर के मुकाबले छोटा होता है मोरनी मिलन के बाद 4 से 8 अंडे देती है इन अंडों से नन्हे मोर को निकलने में 30 दिन तक का वक्त लगता है इस तरह मोरो की प्रजाति का विकास आगे बढ़ता है


    मोर पर निबंध का निष्कर्ष

    भारत का राष्ट्रीय पक्षी तथा हिंदू धर्म में इतना स्थान होने के बाद भी आज मोरों की संख्या बहुत कम है भारत सरकार द्वारा मोरों का शिकार पर प्रतिबंध बहुत पहले से ही लगाया जा चुका है लेकिन बढ़ते प्रदूषण तथा जंगलों की अंधाधुंध कटाई की वजह से आज मोरों के साथ साथ अन्य सुंदर प्रजातियों पर भी संकट मंडराता जा रहा है
    खासकर पिछले एक दो दशक से तो इनकी संख्या में अत्यंत गिरावट दर्ज की गई है हमें इकट्ठे मिलकर इस सुंदर प्रजाति की रक्षा के लिए कदम उठाने पड़ेंगे और हमारे पर्यावरण को सभी के रहने के लिए अनुकूल बनाना पड़ेगा.

    national bird peacock essay in hindi
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    प्रदूषण

    प्रदूषण पर निबंध

    हमारे आसपास मौजूद पर्यावरण का किसी भी वजह से प्रदूषित होना प्रदूषण कहलाता है इसका मुख्य कारण मानवीय गतिविधियां है जिसकी वजह से प्रदूषण के सतर में बहुत अधिक मात्रा में बढ़ोतरी दर्ज की गई है

    आज विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है जंगलो की लगातार कटाई हो रही है जोकि हमारे पर्यावरण के लिए अति उपयोगी है क्योंकि पेड़ पर्यावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड लेकर उसमें ऑक्सीजन देते हैं जो हमारे तथा सभी जीव जंतुओं के लिए जीवन जीने का प्राथमिक स्रोत है इसके अलावा पेड़ पौधों की कटाई से भूमि का लगातार कटाव हो रहा है क्योंकि वह है अपनी जड़ों से भूमि को बांधकर रखते हैं आज हमें बिन मौसम बारिश देखने को मिलती है जिसका कारण पेड़ों की कटाई ही है क्योंकि वह वर्षा के लिए उपयोगी होते हैं

    बदलते रहन सहन की वजह से आज हम किसी भी छोटी से छोटी जगह पर जाने के लिए अपने यातायात के साधन का इस्तेमाल करते हैं जिन से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को बहुत अधिक प्रभावित करता है खासतौर पर सड़कों पर मौजूद पुराने वाहन जिनकी ना तो समय पर जांच की जाती है ना ही उन्हें मरम्मत करने योग्य समझा जाता है इसके अलावा वाहनों से निकलने वाले शोर से न केवल इंसानों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है लेकिन जीव-जंतु भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं

    आज उद्योग धंधे, फैक्ट्रियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है लेकिन ज्यादातर उद्योग पर्यावरण के प्रति ध्यान नहीं देते इसके कारण उद्योगों से निकलने वाला खतरनाक कचरा सीधे जल स्रोतों में प्रवेश कर रहा है इससे न तो वह जल पीने योग्य रहता बल्कि उसमें मौजूद जीव जंतु को भी उस में जीवित रहने के लिए जूझना पड़ता है उद्योगों से निकलने वाले दुहे से पर्यावरण में जहरीली गैस से मिल रही

    इन सभी चीजों की वजह से प्रकृति का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है वह वन्य जीव जो पृथ्वी पर लाखो सालों से मौजूद थे तथा उन्होंने पृथ्वी पर तरह-तरह की घटनाओं को झेला वह भी इस प्रदूषण के सामने अपने जीवन की लड़ाई हार रहे हैं इसी कारण आज बहुत सारी दुर्लभ प्रजातियां लुप्त हो रही है या फिर लुप्त होने की कगार पर है
    हमें इसके प्रति जागरूक होने की अत्यंत आवश्यकता है ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके यह प्रदूषण का ही प्रभाव है कि आज स्कूल के विभिन्न कक्षाओं के विधार्थी को इसके प्रति जानकारी दी जाती है ताकि वह बड़े होकर एक पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यक्ति बन सके

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      ग्लोबल वार्मिंग

      ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध


      ग्लोबल वार्मिंग का अर्थ है धरती के औसतन तापमान में बढ़ोतरी या फिर कहे धरती के प्राकृतिक संतुलन में अनचाहा बदलाव आना, आज ग्लोबल वार्मिंग एक ऐसा विषय है जिस पर हम कोई बात तो करता है लेकिन कभी भी सही तरीके से इसके बचाव के उपायों का पालन नहीं करता,

      औद्योगिक क्रांति से ही पूरी दुनिया में उद्योग धंधों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है, इसकी वजह से उनसे निकलने वाला धुआं तथा जहरीले पदार्थ सीधे हमारे वायुमंडल में जाते हैं तथा इस वायुमंडल में मौजूद हमारे रक्षा करने वाली वायु की परतों जीने हम ओजोन लेयर भी कहते हैं को हानि पहुंचाते हैं

      अगर आज के आधुनिक समय की बात करें तो पिछले कुछ सालों में सड़कों पर इतनी तेज गति से वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है जिससे कि उनसे निकलने वाले धुआं शहरों में लोगों का रहना काफी परिश्रम से भरा कर रहा है इसके अलावा इंसानी गतिविधियां जैसे पेड़ों की लगातार कटाई, उद्योग से निकलने वाले जहरीले रसायनिक पदार्थ को जल में प्रवाहित करना, कोयले से चलने वाले प्लांट, तथा  प्राकृतिक संसाधनों का बहोत अधिक इस्तेमाल इस्तेमाल भी ग्लोबल वार्मिंग के कारण में शामिल है

      यह सब किसी ने किसी वजह से हमारे पर्यावरण को तो हानि पहुंचाते ही हैं इसके साथ ही हमारे जलीय तथा भूमिया जीव जंतुओं को भी लुप्त होने के कगार पर पहुंचा रहे हैं इन सभी गतिविधियों की वजह से आज धरती का तापमान अत्यंत चिंताजनक रूप से बड़ा है

      कुछ देश तो आने वाले 20 साल में पानी में समा जाने की हालत में पहुंच चुके होंगे इसका कारण हमारे ध्रुव तथा पर्वतों की चोटियों पर मौजूद ग्लेशियरों का तेज गति से पिघलना है क्योंकि धरती का तापमान बढ़ रहा है तो इन जगह पर भी तापमान बढ़ रहा है और बर्फ पिघल रही है

      हमारे उत्तर तथा दक्षिण ध्रुव पर रहने वाले जीव जो हजारों सालों से अपने वजूद को जिंदा रखे हुए थे वह भी पिछले 100 सालों में हुए इंसान गतिविधि की वजह से बहुत तेजी से लुप्त हो रहे हैं आज बेमौसम बारिश या बारिश का होना हमारे गतिविधियों तथा ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही है

      इसके लिए हमें चाहिए की आज इंटरनेट की मायावी सोशल मीडिया की दुनिया से निकलकर थोडे समय अपने सुंदर ग्रह के लिए परिश्रम करें तथा पेड़ पौधे लगाए और जितना हो सके वाहनों का तब इस्तेमाल करें जब जरूरी हो एवं वर्षा के जल को संग्रह करे ताकि हम जरूरत पड़ने पर इसको इस्तेमाल कर सकें

      essay on global warming in hindi
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      कंप्यूटर और इसके महत्व

      कंप्यूटर पर निबंध

      कंप्यूटर मानव इतिहास की क्रांतिकारी खोज है जिसने हमारे जीवन जीने के तरीके को बहुत अधिक प्रभावित किया है, खासकर पिछले 20 सालों से तो हम कंप्यूटर के बिना आज के दौर की कल्पना ही नहीं कर सकते, आज चाहे आप बैंक में कोई काम करने जाएं या एटीएम में पैसे निकलवाने या फिर कोई विद्यालय या नौकरी का फार्म ही क्यों न भरना हो हर जगह कंप्यूटर काम आता है हम कंप्यूटर में इंटरनेट की मदद से दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने मे बैठे किसी व्यक्तियों के साथ बहुत आसानी से बात कर सकते हैं

      जिस काम को करने में पहले बहुत अधिक परिश्रम और बहुत अधिक लोगों की आवश्यकता होती थी आज वह काम कंप्यूटर की वजय से बहुत कम समय में हो जाता है

      लेकिन यह एकदम नहीं हो पाया इसके लिए वैज्ञानिकों द्वारा सालों तक शोध और कठिन परिश्रम किया गया, इसी का परिणाम आज हम देख्ते है कि पहला कंप्यूटर जो एक कमरे जितने आकार का होता था आज हमारे हाथ में पकड़ कर चलने वाले साइज का हो गया है

      यहां तक कि आजकल टच स्क्रीन कंप्यूटर का जमाना है अगर हम मोबाइल फोन की बात करें तो वह भी कंप्यूटर क्रांति की ही देन है

      इन सभी बातों से यह जाहिर हो जाता है कि कंप्यूटर ने मानव जीवन पर बहुत गहरा असर डाला है लेकिन हमें इसका इस्तेमाल जरुरत के  हिसाब से ही करना चाहिए, अक्सर देखा गया है कि विद्यार्थी एवं नौजवान काफी वक्त कंप्यूटर पर गेमिंग, गाने, मूवी देखने में बिताते हैं जो कि हमारे कीमती समय की बर्बादी है हमें इन चीजों को एक निश्चित मात्रा में देखना चाहिए, ताकि हम इस क्रांतिकारी उपकरण कै इस्तेमाल से हमारा बेहतर भविष्य बना सके.

      essay on computers in hindi
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