बाल मजदूरी

बचपन के दिन भी बहुत खास होते हैं किसी ने बचपन में पढ़ाई में कारनामा क्या होता है किसी ने किसी अन्य जगहों में और बचपन के दिन हमेशा ही हमें उत्साह से भर देते हैं क्योंकि वह समय कुछ ऐसा होता है ना कोई सांसारिक चिंता और ना ही भविष्य का पता पर उनका क्या जिनका बचपन ही नहीं होता जी हां हम बात कर रहे हैं बाल मजदूरी की क्योंकि वह इस बदलते संसार में कहीं दूर रह जाते हैं.

बाल मजदूरी पर निबंध क्यों महत्वपूर्ण है?

बाल मजदूरी देश के लिए बहुत ही गंभीर समस्या है इसीलिए स्कूलों में इसके प्रति जागरूकता के लिए बहुत से कार्यक्रम चलाए जाते हैं इन्हीं में से एक है बच्चों को बाल मजदूरी पर निबंध लिखने के लिए प्रेरित करना क्योंकि जो वह बाल मजदूरी पर निबंध लिखेंगे तो उन्हें बाल मजदूरी का ज्ञान होगा और वह अपने समाज की इन बुराइयों को खत्म कर पाएंगे. हम भी इसका ध्यान रखते हैं इसलिए आपको  बाल मजदूरी से जुड़े हुए अलग अलग निबंध मिलेंगे आप अपने आवश्यकता अनुसार इन निबंधों को अपने कार्यक्रम में जोड़ सकते हैं.

बाल मजदूरी 

किसी बच्चे का अपने बचपन में मजदूरी करना बाल मजदूरी कहलाता है और उसकी उम्र 14 साल से कम हो, इसका मुख्य कारण अशिक्षा और गरीबी है, जब कोई मां-बाप अपने बच्चे का पेट भर पाने में असमर्थ रहता है तब हुआ है उन्हें बाल मजदूरी के दलदल में गिरा देता है ताकि वह कुछ आमदनी कर पाए और परिवार का गुजारा हो पाए, कई बार शिक्षा का अभाव होने की वजह से मां बाप शिक्षा को इतना तवज्जो नहीं देते मुल्की पैसे कमाने को तवज्जो देते हैं जिससे वह कम उम्र में ही अपने बच्चों को बाल मजदूरी करने की और धकेल देते हैं
अगर बाल मजदूरी के आंकड़ों की बात करें तो दिल्ली और यूपी में सबसे ज्यादा बाल मजदूर है यह दोनों मिलकर 2000000 से भी अधिक बाल मजदूर के मजदूरी की जगह बने हुए हैं
इसके बाद बिहार राजस्थान महाराष्ट्र मध्य प्रदेश का नंबर आता है यहां भी बाल मजदूरी करने वालों की कमी नहीं है, बाल मजदूरी करने वालों में ज्यादातर लड़के होते हैं और लड़कियों को अक्सर घर के काम सोपे जाते हैं
बाल मजदूरी के अभिशाप की वजह से बच्चे अपने बचपन में खेलकूद शिक्षा हंसी मजाक और स्नेह से दूर रहते हैं जिससे कि थोड़ा बड़ा होने पर उन्हें कॉफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है ज्यादातर देखा गया है
इसके अलावा उन्हें काफी बीमारियां भी जकड़ लेती है खासकर जिन्होंने फैक्ट्रियों या कोयले य हीरे की खदानों में काम किया होता है
बाल मजदूरी किसी भी देश के लिए बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि बच्चे वह सुंदर पौधा है जो बड़ा होकर पेड़ बनेगा और उसके फल से सभी को लाभ होगा, इसलिए बचपन की परवरिश और शिक्षा देश को आगे बढ़ाने के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है सरकार के बहुत सारे कानून और उपाय के बाद भी बाल मजदूरी की समस्या कम नहीं हुई है क्योंकि जब तक देश का आम नागरिक जागरूक नहीं होगा तब तक कोई भी योजना या कानून अच्छी तरह काम नहीं कर सकता इसीलिए हमें इसके प्रति जागरूक होना पड़ेगा, खासकर बच्चों को जो शिक्षा ले रहे हैं और जी ने अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए की बहुत सारे इन चीजों के अभाव में है और हमें बढ़ा आदमी बनकर इन सबको दूर करना है ताकि देश सभी के रहने के लिए अच्छी जगह बन पाए.

बाल मजदूरी के क्या कारण है जिनसे एक बच्चा मजदूरी करने लगता है


बाल मजदूरी किसी एक वजह से नहीं होती बहुत सारी चीजें या कारण होते हैं जब कोई बच्चा मजदूरी शुरू करता है आज इनमें से कुछ बाल मजदूरी के कारण देखेंगे
सबसे पहला कारण गरीबी होता है क्योंकि जब किसी के पास खाने के लिए खाना पहनने के लिए कपड़े और रहने के लिए मकान ना हो तो वह अपने बच्चों को मजदूर के रूप में देखता है
दूसरा मुख्य कारण स्कूलों का अभाव और सरकार की अनदेखी है आज भी 80 हजार से ज्यादा ऐसी स्कूल है जिनमें ब्लैक बोर्ड नहीं है और लगभग 40000 स्कूलों में पक्की बिल्डिंग नहीं है जिससे कि आप समझ ही सकते हैं कि किसी का स्कूल में जाने का कैसे मन करेगा
परिवारों का लालच भी बाल मजदूरी का मुख्य कारण है आज भी 25 से 40% परिवार की आमदनी बाल मजदूर करते हैं जिससे कि परिवार को बाल मजदूरी अच्छी लगने लगती है और वह अपने बच्चों को बाल मजदूरी के लिए नहीं रोकते इसके अलावा कई बार बाल मजदूर पैसों का लालच करने लग जाता है और इस मजदूरी की दलदल में पता चला जाता है
अन्य कारणों की बात करें तो बाल मजदूरी का एक और मुख्य कारण सस्ती मजदूरी है बहुत सारे बाल मजदूर को दुकानों और फैक्ट्रियों में इसलिए रख लिया जाता है क्योंकि वह एक वैशक की तुलना में बहुत कम मजदूरी लेते हैं इससे दुकान और फैक्ट्री मालिक भी लालच कर लेते हैं और बच्चों को मजदूरी पर रख लेते हैं
इसके अलावा लोगों का जागरूक ना होना भी बाल मजदूरी का एक मुख्य कारण है आमतौर पर हम किसी भी बाल मजदूर को किसी दुकान होटल है फैक्ट्री में देखकर आसानी से अनदेखा कर देते हैं इसकी वजह से यह एक आम बात सी बन चुकी है पर हम भूल जाते हैं कि अगर हमारे साथ ऐसा हुआ होता तो आज हम इस जगह नहीं होते हैं और समाज में हमारा क्या स्थान होता.

बाल मजदूरी के क्या परिणाम हो सकते हैं किसी देश के लिए



अगर बाल मजदूरी के परिणाम की बात करें तो इसके अत्यंत भयानक परिणाम है जिससे कोई देश बहुत अधिक प्रभावित होता है
सबसे बड़ा बाल मजदूरी का यह नतीजा निकलता है कि देश अशिक्षित रह जाता है जो लोग अपने बच्चों से बाल मजदूरी कराते है वह ज्यादातर अशिक्षित होते हैं और फिर बाल मजदूरी के वजह से बच्चे भी अशिक्षित रह जाते हैं इस तरह देश का एक कस्बा कभी शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता और आज के आधुनिक युग में अगर कोई अशिक्षित है तो अभय तेजी से बदलती दुनिया में कहीं टिक नहीं पाता
अगर बाल मजदूरी के परिणामों की बात करें तो इसमें बच्चों का शोषण भी आता है ज्यादातर बच्चे जो बाल मजदूरी करते हैं कभी ना कभी शोषण का शिकार हो ही जाते हैं जिनसे उनकी मानसिकता पर काफी प्रभाव पड़ता है
अगर कोई बच्चा बाल मजदूरी करता है तो उसका शारीरिक और मानसिक विकास बुरी तरह प्रभावित होता है और किसी भी देश या प्रदेश के लिए यह बहुत बुरी की बात है की उनके बच्चों का विकास ना होना
बाल मजदूरी करने वाला बच्चा ज्यादातर अपनी शारीरिक जरूरत है कम आहार प्राप्त करता है जिससे कि कुपोषण का शिकार आसानी से हो जाता है
बाल मजदूर से देश में असमानता पैदा होती है बहुत सारे लोग जो पहले से ही अमीर है वह और अमीर बनते जाते हैं और जो वर्ग बाल मजदूरी की जकड़ में है वह हमेशा गरीब रहता है अगर भारत की बात करें तो भारत में है ऐसा मानता बहुत ज्यादा है किसी समूह पर धन का बहुत बड़ा हिस्सा है तो किसी के पास जीवन व्यापन करने के लिए भी धन नहीं है


बाल मजदूरी खत्म करने के लिए क्या उपाय बरतने चाहिए



बाल मजदूरी अगर सच में ही खत्म करनी है तो सबसे पहले हमें अपनी सोच बदलनी पड़ेगी क्योंकि जब तक सोच नहीं बदलेगी तब तक समाज नहीं बदलेगा माता पिता को अपने बच्चों के प्रति जागरूक होना उन्हें यह समझना पड़ेगा कि जो गरीबी उन्होंने बचपन में देखी है कम से कम अपने बच्चे को अच्छी तरह पढ़ा लिखा करो बुढ़ापे में तो यह गरीबी ना देखें और लोगों को भी बाल मजदूर के प्रति घृणा भरा भाव खत्म करना पड़ेगा और उनसे सहानुभूति रखनी पड़ेगी जितना हो सके बाल मजदूर की सहायता करनी चाहिए जिससे की उसका बचपन सुरक्षित रहे
सरकार को बाल मजदूरी के कानून और कठिन करने पड़ेंगे जिससे कि कोई भी व्यक्ति अपने पास बाल मजदूर रखते हुए कम से कम दो बार तो जरूर सोचें इसके साथ ही फैक्ट्री और दुकानदारों को भी जागरूक होना पड़ेगा उन्हें सोचना पड़ेगा कि अगर किसी बाल मजदूर की जगह उनका बच्चा होता तो फिर उनका क्या भविष्य होता
सरकारों को चाहिए कि देश के पिछड़े इलाकों में स्कूलों का प्रबंध कराएं और जागरूकता अभियान चलाएं जिसमें शहरी स्कूलों के बच्चों को भी जोड़ा जाए जिस से प्रेरित होकर कम से कुछ बच्चों में तो पढ़ने की लालसा जागे और इसके साथ ही सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति भी हो
अध्यापकों को भी चाहिए कि वह अपना कर्तव्य अच्छी तरह निभाए देश के बहुत सारे इलाकों में यह देखा गया है कि जादर सरकारी स्कूलों के अध्यापक समय पर स्कूल नहीं आते और ना ही बच्चों को अच्छी तरह बनाते हैं जिससे कि बच्चों का भी स्कूल जाने का मन नहीं करता और उनका ध्यान कि नहीं और चीजों की तरफ जाता है

बाल मजदूरी निबंध से हमें क्या सीखने को मिलता है


आखिर में अगर हम बाल मजदूरी का निष्कर्ष निकालें तो पता चलता है कि इससे कहीं पर भी कोई फायदा नहीं होता दो तीन हजार रुपए की बचत के लिए दुकानदारों और फैक्ट्रियों का बाल मजदूरों को रखना देश को करोड़ों अरबों रुपए का नुकसान कर आता है बचपन किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत ही जरूरी समय है इसको व्यर्थ नहीं करना चाहिए और आज हमको पढ़ लेना चाहिए कि कहीं भी अगर बाल मजदूर दिखे तो उससे नजर चुराने की बजाय उसकी सहायता करनी चाहिए क्या पता आपसे कुछ बहुत अच्छा हो जाए

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