जल प्रदूषण और उसके कारण

सतही जल और भूमिगत जल 


सतही जल से तात्पर्य वह जल जो धरती की सतह के ऊपर मौजूद होता है जैसे की कुओं झीलों तथा नदियोंं में पाए जाने वाले जल को हम सतही जल कहेंगे यह जल अलग-अलग कारणों से प्रदूषित हो सकता है जैसे कि फैक्ट्रियों के कचरे जानवरों के मल पेस्टिसाइड या फिर किसी रसायनिक पदार्थ की मदद से |
सतही जल का मुख्य कारण बारिश या बाढ़ के पानी का एक जगह पर इकट्ठा हो जाना है अगर स्थाई जल के सबसे बड़े स्थान की बात करें तो वह समुंद्री जल है |

अगर भूमिगत जल की बात करें तो यह वह जल है जो धरती के अंदर मौजूद होता है और हम इसे हैंड पंप की मदद से बाहर निकालते हैं भूमिगत जल स्त्रोत तब बनते हैं जब लंबे समय तक भूमि द्वारा जल को सोखा जाता है तथा उसके बाद जल एक ऐसी जगह पर जाकर इकट्ठा हो जाता है जहां के नीचे पथरीली सतह होती है ताकि जल कहीं और ना जा पाए और धीरे-धीरे जल यहां इकट्ठा होकर एक भूमिगत जल स्त्रोत बना देता है

जल प्रदूषण 


आज के आधुनिक युग ने हमारा रहना काफी सरल बनाया है जितनी प्रगति हमने पिछले 100 सालों में की है उतने तो शायद हजार सालों में भी नहीं की होगी आज बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों मैं हमारी जरूरत के सारे सामान आसानी से निर्मित हो जाते हैं यातायात के साधनों की वजह से आज हम कुछ ही पलों में देश के एक कोने से दूसरे कोने में पहुंच सकते हैं वैज्ञानिक पद्धति की वजह से हम आज कम समय में ज्यादा पैदावार कर सकते हैं लेकिन हमारी इन बढ़ती जरूरतों की वजह से हमने प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया है इनमें से एक है जल जिस के बगैर धरती पर जीवन की कल्पना करना भी नामुमकिन है लेकिन तरक्की की रफ्तार में हमने जल संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जिसके कारण आज पीने लायक जल की मात्रा लगातार घट रही है

अगर जल प्रदूषण की बात करें तो रसायनिक तथा विषैले पदार्थों का किसी भी माध्यम की वजह से स्वस्थ जल में मिलकर उसकी उपयोगिता को कम या खत्म करना जल प्रदूषण कहलाता है जिसका मुख्य कारण घरों,उद्योग धंधों के कचरे का सीधे तथा किसी माध्यम की वजह से जल में प्रवेश करना

आज फैक्ट्रियों से निकलने वाले विषैले पदार्थ सीधे जल स्रोतों जैसे नदियों तथा झीलो में प्रवेश कर रहे हैं जोकि नए केवल उसे मनुष्य के लिए जहरीला बना रहे बल्कि जल में रहने वाले जीबी उसका शिकार हो रहे हैं यहां तक की नदियों के किनारे वाले गांव तथा पेड़ पौधे इसकी चपेट में आ रहे हैं

अगर कृषि क्षेत्र की बात करें तो खाद्य पदार्थों की बढ़ती जरूरत की वजह से आज भूमि का अत्यधिक दोहन हो रहा है आज किसान अपनी पैदावार को बढ़ाने के लिए तरह-तरह के रासायनिक पदार्थों का खेतों में छिड़काव कर रहे हैं और जब यह रसायनिक पदार्थ सत्यही जल के साथ मिलकर हमारे भूमि में प्रवेश करते हैं तो मिट्टी की उर्वरक क्षमता को तो घट आते ही है उसके साथ साथ भूमि ए जल को भी दूषित करते हैं
कृषि में इस्तेमाल होने वाले इन रसायनिक पदार्थों की वजह से आज नए केवल तरह-तरह की बीमारियां सामने आ रही है
जल प्रदूषण का सबसे गहरा असर तो जल में रहने वाले जीव जंतुओं पर पड़ा है आज नदियों तथा झीलों में रहने वाले जीवो की संख्या लगातार घट रही जिससे की प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है

 भूजल के अत्यधिक दोहन की वजह से आज उसका स्तर लगातार घटता जा रहा है कई जगह पर तो यह बहुत ही खतरनाक रूप से नीचे गया हें जिससे कि कई जगह पर तो पीने का पानी भी आसानी से नहीं मिल पा रहा आज गांवों में मौजूद कुए तथा तलाब लगभग लुप्त हो चुके हैं या फिर विलुप्त होने की कगार पर है और इसका एक ही कारण है जल का आवश्यकता से अधिक उपयोग,

और इसके परिणाम अत्यंत गंभीर है जल के मौजूद ना होने की वजह से उस क्षेत्र में कृषि करना काफी कठिन हो चुका है आज जल ना होने की वजह से लोग अपने क्षेत्रों से पलायन करके दूसरे क्षेत्र में जा रहे हैं

इसके अलावा जब नदियों का प्रदूषित जल समुद्री पानी से मिलता है तो वह उसे भी दूषित करता है जिससे कि समुद्री जीवों के प्रजातियां तथा समुद्री वनस्पति पर गंभीर खतरा मंडराता जा रहा है अक्सर यह भी देखा गया है कि तेल से भरे जहाज अक्सर समुंदर में डूब जाते हैं या फिर कुछ हादसे की वजह से तेल का रिसाव हो जाता है जिससे कि सैकड़ों टन तेल समुंदर में फैल जाता है जो कुछ ही पल में लव कुश मंत्री जी वो के लिए काल बन जाता है इसके अलावा वह जल को बहुत अधिक मात्रा में प्रदूषित कर देता है

इसके अलावा गांवों में यह देखा गया है कि लोग जल स्त्रोतों के पास अपने कपड़े धोते हैं स्नान करते हैं तथा अपने पशुओं को भी वही नहलाते हैं अक्सर पशु जल में ही गोबर कर देते हैं इन सभी कारणों की वजह से जल प्रदूषित हो जाता है


जल प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार द्वारा चलाई गई विभिन्न योजनाएं जो नदियों तथा झीलों को साफ करने के लिए बनाई गई थी बुरी तरह से नाकामयाब रही है इसका मुख्य कारण जल प्रदूषण का खतरनाक स्तर पर पहुंचना है

वहीं लोगों का जल प्रदूषण के प्रति जागरूकता का न होना भी एक मुख्य कारण है क्योंकि जब तक लोग जागरुक नहीं होंगे तब तक इस समस्या का समाधान निकाला लगभग नामुमकिन है क्योंकि जल को प्रदूषित करने में हम सबकी भागीदारी एक समान ही है और इसके बुरे प्रभाव भी हमें ही भुगतना पड़ रहे हैं तो आज हमें यह प्रण लेना पड़ेगा की जल का उपयोग आवश्यकता अनुसार ही करेंगे और जल में कूड़ा कचरा नहीं डालेंगे क्योंकि एंजल होगा तभी हम होंगे

सतही जल प्रदूषण और भूमिगत जल प्रदूषण


सतही जल से तात्पर्य वह जल जो धरती की सतह के ऊपर मौजूद होता है जैसे की कुओं झीलों तथा नदियोंं में पाए जाने वाले जल को हम सतही जल कहेंगे यह जल अलग-अलग कारणों से प्रदूषित हो सकता है जैसे कि फैक्ट्रियों के कचरे जानवरों के मल पेस्टिसाइड या फिर किसी रसायनिक पदार्थ की मदद से,
सतही जल का मुख्य कारण बारिश या बाढ़ के पानी का एक जगह पर इकट्ठा हो जाना है अगर स्थाई जल के सबसे बड़े स्थान की बात करें तो वह समुंद्री जल है
अगर भूमिगत जल की बात करें तो यह वह जल है जो धरती के अंदर मौजूद होता है और हम इसे हैंड पंप की मदद से बाहर निकालते हैं भूमिगत जल स्त्रोत तब बनते हैं जब लंबे समय तक भूमि द्वारा जल को सोखा जाता है तथा उसके बाद जल एक ऐसी जगह पर जाकर इकट्ठा हो जाता है जहां के नीचे पथरीली सतह होती है ताकि जल कहीं और ना जा पाए और धीरे-धीरे जल यहां इकट्ठा होकर एक भूमिगत जल स्त्रोत बना देता है

आज अलग-अलग कारणों की वजह से स्थाई जेल और भूमिगत जल दोनों ही बहुत तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं अगर स्त्री जल प्रदूषण की बात करें तो वह हमें रोजाना की दिनचर्या में देखने को मिलता है शहरों तथा महानगरों से निकलने वाला शिविर की पाइप सीधे नदियों तथा तालाबों में गिरती है जो कि जल को प्रदूषित करते ही है उसके साथ ही उसमें बहुत सारे बैक्टीरिया पनपते हैं और मच्छर इनमें अपना लारवा देते हैं जो बाद में इंसानों में तरह-तरह की बीमारियां पैदा करते हैं इसके साथ-साथ फैक्ट्रियों से निकलने वाला खतरनाक कचरा और यहां तक कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से बी बचा हुआ अवशेष को सीधे जल स्त्रोतों में बहा दिया जाता है वहीं दूसरी ओर कृषि में इस्तेमाल होने वाले तरह-तरह के रसायनिक पदार्थ जो पैदावार को पढ़ाते हैं वह जल और भूमि दोनों दोनों को प्रदूषित कर रहे हैं जिससे भूमि की उपजाऊ समता तो कम हो ही रही है उसके साथ साथ इस भूमि पर पनपने वाले फल तथा सब्जियों के सेवन से भी मनुष्य को भी बीमारियां लग रही है

वहीं दूसरी और भूमिगत जल प्रदूषण की बात करें तो उसका एक मुख्य कारण स्थाई जलता प्रदूषित हो ना तो है ही क्योंकि स्पीजल प्रदूषित होकर धीरे धीरे नीचे जाता है और धरती में मौजूद जल को भी दूषित कर देता है वहीं इश्के अन्य कारण पावर प्लांट से निकलने वाला सल्फर डाइऑक्साइड, और फैक्ट्रियों से निकलने वाला अमोनिया और स्टर्जन शामिल है

भूमिगत जल के कारणों का सीधे तौर पर पता लगाना तथा उनका रोकथाम करना काफी मुश्किल है सही जल के मुकाबले क्योंकि इसका हम सीधे तौर पर अध्ययन नहीं कर सकते

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