बाल मजदूरी

बाल मजदूरी पर निबंध

किसी भी देश या परिवार की सबसे अमूल्य संपत्ति उसके बच्चे होते हैं क्योंकि वहीं आगे चलकर देश की बागडोर संभालते हैं अगर उनको बचपन में अच्छे संस्कार अच्छा व्यवहार और अच्छी शिक्षा मिली हो तो वे देश की दिन दुगनी चार जोगिनी तरक्की करवाते हैं

लेकिन अगर किसी को बचपन में ना तो शिक्षा मिले और हमेशा उसके साथ दूर व्यवहार हो तो आप समझ सकते हैं फिर क्या होगा,

कुछ ऐसा ही होता है भारत के एक करोड़ और पूरी दुनिया के 21 करोड़ बच्चों के साथ जो बाल श्रम करते हैं यानी पैसों या अन्य कारणों की वजह से 14 साल से कम ही उम्र में काम करना और यह हाल तब है जब देश में बाल श्रम करवाना या बाल श्रम पर रखना एक अपराध है अगर हम अपने मूलभूत अधिकारों की बात करें तो बचपन में मूलभूत सुविधाओं का मिलना भी एक अधिकार है,

और माता पिता का यह कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को कम से कम मूलभूत सुविधाएं तो प्राप्त कराएं, पर देश में अशिक्षा और गरीबी की वजह से यह सब किताब की बातें बनकर रह गए हैं

आप किसी भी व्यापार या किसी भी फील्ड में चले जाइए आपको कहीं ना कहीं बाल श्रमिक तो जरूर मिल जाएंगे चाहे वह देश का कितना भी विकसित एरिया क्यों ना हो बल्कि वहां आपको और ज्यादा बार श्रमिक देखेंगे, यहां तक की डेंजरस प्लेस जैसे कोयले की खाने, विस्फोटक स्थान, जहां पर सरकार ने 15 से 18 साल तक के आर यू वालों के लिए भी निर्देश दे रखे हैं वहां पर बी 10 लाख से ज्यादा बाल श्रमिक मिल जाएंगे पूरी दुनिया में अगर नंबर के हिसाब से देखें तो भारत पहले नंबर पर आता है बाल श्रमिकों में जोकि बहुत शर्मनाक बात है और इससे भी बुरा हाल कुछ उत्तरी अफ्रीकी देशों में है जहां स्थिति और भी भयानक है

क्योंकि बाल श्रमिकों का प्रतिशत बाकी बालकों की तुलना में बहुत ज्यादा है

बाल श्रमिक करने वालों का न तो अच्छी तरह दिमागी विकास हो पाता और ना ही शारीरिक जिसकी वजह से वह अपने जीवन में फैसले लेने में बहुत तकलीफ महसूस करते हैं बहुत सारे बाल श्रमिक गंदे के संपर्क में आ जाते हैं
जिससे कि उनमें कई तरह के अपराधिक बातें आ जाती है और जब वह बड़े होते हैं तो समाज उन्हें अच्छी तरह स्वीकार नहीं करता

अगर बाल श्रमिकों की वजह की बात करें तो इस समय गरीबी स्कूलों की कमी करप्शन सस्ते श्रमिक आते हैं
जिसमें सबसे बड़ा कारण गरीबी ही होता है और अगर कोई किसी तरह गरीबी की जंजीर छोड़कर स्कूल भी जाना चाहे तो स्कूल नहीं मिलता है अगर स्कूल मिल जाए तो शिक्षकों का अभाव और शिक्षकों की गुणवत्ता किसी से छुपी नहीं हैऔर निजी स्कूलों की फीस भरने में वह असमर्थ होते हैं

देश में नेताओं का करप्शन भी बाल श्रमिक में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है हालांकि कुछ समय से सरकार द्वारा बाल श्रमिक को खत्म करने के लिए काफी योजनाएं और कानून में सुधार किए गए हैं पर फैक्ट्री और दुकानों के मालिक सस्ते बाल कारीगर के लालच में बच्चों को काम पर रख लेते हैं पर ईस में माता पिता की भूमिका
कम नहीं होती

इन सभी बातों से हमें आज प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि बाल मजदूरी खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और इसके प्रति समाज को जागरूक करेंगे


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